मध्य पूर्व में तनाव का असर: US EIA ने कच्चे तेल की कीमत का अनुमान बढ़ाकर 105 डॉलर किया

Kush Singh7 October 20262 min read0 viewsFinance
मध्य पूर्व में तनाव का असर: US EIA ने कच्चे तेल की कीमत का अनुमान बढ़ाकर 105 डॉलर किया

दुनियाभर के बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का अनुमान बढ़ा दिया है। अब एजेंसी का मानना है कि इस दौरान तेल की औसत कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है। पिछले महीने के अनुमान के मुकाबले इसमें 14 डॉलर प्रति बैरल की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है।

कीमतों में इस उछाल के पीछे मुख्य कारण मध्य पूर्व (Middle East) में जारी अस्थिरता और तेल की सप्लाई में आने वाली बाधाएं हैं। EIA के मुताबिक, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों और क्षेत्र में तेल के प्रवाह में आने वाली दिक्कतों की वजह से बाजार में दबाव बना हुआ है। हालांकि, सितंबर में उत्पादन में गिरावट पिछले कुछ समय के मुकाबले कम रही है, लेकिन सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों ने यह साफ कर दिया है कि फिजिकल ऑयल सप्लाई और कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा अब भी बरकरार है।

डीजल की कमी और अमेरिकी बाजार का हाल

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सिर्फ सप्लाई चेन ही नहीं, बल्कि डीजल मार्केट में आई तंगी भी कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर धकेल रही है। डीजल की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनर कच्चे तेल की प्रोसेसिंग बढ़ा रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर अमेरिका के रिटेल फ्यूल मार्केट में भी दिखा है, जहां सितंबर में गैसोलीन की औसत कीमत 4.35 डॉलर और डीजल की कीमत 6.29 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई।

एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी प्रकाश डाला है:

  • भविष्य का अनुमान: अल्पकालिक दबाव के बावजूद, EIA को उम्मीद है कि 2027 तक बाजार में स्थिरता आएगी और ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत गिरकर 84 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकती है।
  • इन्वेंटरी की स्थिति: अमेरिका के ईस्ट कोस्ट पर डिस्टिलेट इन्वेंट्री अपने पांच साल के औसत से काफी नीचे है, जिससे सर्दियों तक आपूर्ति की चुनौती बनी रह सकती है।
  • नेचुरल गैस: हेनरी हब नेचुरल गैस की कीमतों में 2027 तक गिरावट आने का अनुमान है, जिसका मुख्य कारण उत्पादन में वृद्धि और अधिक इन्वेंट्री होगी।

गौरतलब है कि यह पूर्वानुमान 1 अक्टूबर तक उपलब्ध बाजार आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है और इसमें उसके बाद के घटनाक्रमों या G7 द्वारा घोषित नई ऊर्जा आपूर्ति को शामिल नहीं किया गया है।

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