US का ईरान पर बड़ा दबाव, न्यूक्लियर हथियारों को रोकने के लिए 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति जारी

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत Mike Waltz ने 21 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया कि राष्ट्रपति Donald Trump का प्रशासन ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस मकसद को पूरा करने के लिए अमेरिका अपनी 'मैक्सिमम प्रेशर' यानी अधिकतम दबाव वाली नीति को आगे भी जारी रखेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर तेहरान यानी ईरान की सरकार ईमानदारी से बातचीत करने के लिए आगे आती है, तो कूटनीति के दरवाजे अभी भी खुले हुए हैं। इस पूरी जानकारी को अमेरिकी मिशन की आधिकारिक वेबसाइट USUN Source पर साझा किया गया है।
राष्ट्रपति ट्रंप का संयुक्त राष्ट्र में संबोधन और ईरानी मंत्रियों का दौरा
राष्ट्रपति Donald Trump अपने आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा के भाषण में ईरान के परमाणु कार्यक्रमों की अस्वीकार्यता पर कड़ा रुख अपनाने वाले हैं। इस कूटनीतिक हलचल के बीच, ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं, जबकि ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Mohsen Rezaee ने हाल ही में दोनों देशों के बीच रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। ये शर्तें जून महीने के इस्लामाबाद समझौते पर आधारित बताई जा रही हैं। इन शर्तों में विदेशों में जमे हुए ईरानी पैसों की वापसी, सभी मोर्चों पर चल रहे सैन्य संघर्ष को रोकना, ईरान के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी बंद करना, ईरानी जमीन पर हमलों को रोकना और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को हटाना शामिल है।
अमेरिका द्वारा कड़े कानून और कतर की मध्यस्थता
कूटनीतिक कोशिशों के साथ-साथ अमेरिका ने कानूनी शिकंजा भी कसना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 सितंबर 2026 को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' कानून पर हस्ताक्षर किए। इस नए कानून के तहत ईरान पर लगे पुराने प्रतिबंधों को पांच साल और बढ़ा दिया गया है, जिससे ये पाबंदियां साल 2031 तक पूरी तरह से लागू रहेंगी। दूसरी तरफ, खाड़ी देश कतर पिछले दो हफ्तों से लगातार दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है। कतर की कोशिश है कि किसी तरह वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत के नए रास्ते निकाले जाएं ताकि औपचारिक वार्ताओं को फिर से शुरू किया जा सके।
जारी तनाव के बावजूद, राजदूत Mike Waltz ने यह जानकारी दी कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के साथ चल रहे इस संघर्ष को खत्म करने के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है। उनका मानना है कि लगातार बना हुआ आर्थिक दबाव अमेरिका के रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखने में मदद कर रहा है। खाड़ी देशों में चल रही इन राजनीतिक गतिविधियों और तनाव का असर उन तमाम लोगों पर भी पड़ रहा है जो इस क्षेत्र से जुड़े घटनाक्रमों पर नजर रखते हैं।