ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और IAEA ने जताई चिंता और नियमों के पालन की मांग की
UN सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका और IAEA ने ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर जवाब मांगा और निरीक्षण की मांग की।

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिका ने मांग की है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में भाषण देने के बजाय सीधे जवाब दे और सुरक्षा नियमों का पालन करे।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि ईरान को अपनी सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा करना होगा। उन्होंने ईरान को एक क्रूर तानाशाही बताते हुए कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगी साथी ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वॉल्ट्ज के मुताबिक, ईरान की ये जिम्मेदारियां अन्य देशों के कार्यों से स्वतंत्र हैं।
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने भी परिषद को संबोधित करते हुए तेहरान से परमाणु सामग्री के सत्यापन के लिए तुरंत पहुंच देने की अपील की। उन्होंने बताया कि 60 प्रतिशत शुद्धता वाले 440 किलोग्राम यूरेनियम का पिछले पांच वर्षों से सत्यापन नहीं हो पाया है।
ग्रोसी ने जानकारी दी कि जून 2025 से पहले ईरान निरीक्षण के लिए सहमत था, लेकिन उस महीने हुए सैन्य हमलों के कारण इस्फाहन फ्यूल एनरिचमेंट प्लांट सहित अन्य केंद्रों तक पहुंच नहीं मिल सकी। सुरक्षा कारणों से जून 2025 के अंत में निरीक्षकों को हटा लिया गया था, जो कई महीनों से वापस लौटने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि रिमोट मॉनिटरिंग में 2025 और 2026 के सैन्य हमलों में क्षतिग्रस्त हुए केंद्रों की मरम्मत या पुनर्निर्माण का कोई संकेत नहीं मिला है। हालांकि, ग्रोसी ने जोर देकर कहा कि वास्तविक स्थिति के सत्यापन के लिए केंद्रों तक भौतिक पहुंच का कोई विकल्प नहीं है।
दूसरी ओर, ईरान के संयुक्त राष्ट्र दूत गुलामहुसैन दरजी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु केंद्रों के खिलाफ आक्रामकता और युद्ध अपराध करने का आरोप लगाया।
इस बीच, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने 29 अक्टूबर 2026 को बताया कि तेहरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के साथ संभावित सात दिवसीय योजना के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है। यह पूरा विवाद सितंबर 2026 में IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के उस प्रस्ताव के बाद बढ़ा है, जिसमें परमाणु अप्रसार संधि का पालन न करने पर ईरान की रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को सौंपी गई थी।