ईरान पर अमेरिकी शिकंजा और कसा, ऑटो व रेलवे कंपनियों पर नए प्रतिबंध

Gautam Sahu1 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान पर अमेरिकी शिकंजा और कसा, ऑटो व रेलवे कंपनियों पर नए प्रतिबंध

मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी आर्थिक घेराबंदी को और अधिक मजबूत कर दिया है। वाशिंगटन की तरफ से उठाए गए ताजा कदमों के तहत ईरान के प्रमुख वाहन निर्माताओं और रेलवे सेक्टर से जुड़ी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। अमेरिका का यह कदम तेहरान की सैन्य गतिविधियों और उसकी वित्तीय रीढ़ को कमजोर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के तहत कार्रवाई

अमेरिकी प्रशासन द्वारा यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत की जा रही है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान की आय के तमाम रास्तों को ब्लॉक करना है, ताकि उसे अपनी युद्धक गतिविधियों और मिसाइल कार्यक्रमों को रोकने के लिए मजबूर किया जा सके। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, इन नए प्रतिबंधों की जद में देश के सबसे बड़े वाहन निर्माता और महत्वपूर्ण परिवहन नेटवर्क को लाया गया है।

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किन कंपनियों पर गिरी गाज?

नई पाबंदियों के दायरे में ईरान की वाहन निर्माण से जुड़ी दिग्गज कंपनियां मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • ईरान खोद्रो कंपनी (IKCO) और सैपा (SAIPA): इन दोनों ऑटो कंपनियों का देश के घरेलू वाहन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत से अधिक का एकाधिकार है।
  • इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान रेलवे: सरकारी रेलवे नेटवर्क, जो देश भर में माल और यात्रियों की आवाजाही का मुख्य साधन है।
  • राजा पैसेंजर ट्रेन्स और निजी मालवाहक कंपनी रेलवे ट्रांसपोर्टेशन कंपनी।

विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी तेल के व्यापार पर पहले से ही अमेरिकी नाकेबंदी का भारी दबाव है। ऐसे में ऑटो और रेलवे सेक्टर को निशाना बनाए जाने से ईरान के घरेलू व्यापार और वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था को गहरा झटका लग सकता है।

वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने का प्रयास

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का स्पष्ट कहना है कि यह प्रतिबंध केवल कंपनियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उन सभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं और वित्तीय नेटवर्क्स पर भी कड़ा प्रहार करते हैं जो परोक्ष या अपरोक्ष रूप से ईरान की मदद कर रहे हैं। अमेरिकी नेतृत्व का साफ संदेश है कि जब तक ईरान अपनी क्षेत्रीय और सैन्य महत्वाकांक्षाओं पर लगाम नहीं लगाता, तब तक आर्थिक दबाव का यह सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

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