अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर संघर्ष तेज़, खाड़ी देशों पर मंडराया बड़ा खतरा.

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले एक महीने से चल रहा तनाव अब और ज्यादा बढ़ गया है। 1 सितंबर से 2 सितंबर 2026 के दौरान दोनों देशों की सेनाओं के बीच अब तक की सबसे बड़ी सैन्य भिड़ंत देखने को मिली। इस खतरनाक स्थिति की शुरुआत 30 अगस्त से 1 सितंबर के बीच हुई थी, जब अमेरिकी सेना ने लarak आइलैंड पर एयरस्ट्राइक की थी। अमेरिकी सेना का दावा था कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के सैनिक स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज में समुद्री खदानें बिछाने की तैयारी कर रहे थे और कमर्शियल जहाजों को निशाना बना रहे थे। अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना था कि यह कार्रवाई उनके सैनिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी थी।
मंगलवार को अमेरिकी सेना ने अंदरूनी इलाकों को बनाया निशाना
मंगलवार, 1 सितंबर को अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने यह पुष्टि की कि उन्होंने ईरान के अंदर घुसकर कई ठिकानों पर हमले किए हैं। इस कार्रवाई में ईरान के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस साइट्स, कम्यूनिकेशन हब और समुद्री संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इस ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी सेना ने एक नया नियम लागू करते हुए दो ईरानी सरकारी टैंकरों को भी अपना निशाना बनाया। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने रडार सिस्टम पर हुए हमलों की पुष्टि करते हुए ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान ने इसके बाद कोई भी पलटवार किया, तो अमेरिका की तरफ से हमला और भी ज्यादा बड़े पैमाने पर किया जाएगा।
ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों में खलबली
अमेरिका के इन हमलों के जवाब में ईरान चुप नहीं बैठा और उसने रात भर में कई ड्रोन और मिसाइलें दाग दीं। ईरानी सेना ने दावा किया कि उन्होंने जॉर्डन में मौजूद Camp Titin (Prince Hassan airbase), कुवैत के Ali Al Salem Air Base, बहरीन के Sheikh Isa airbase और इराक के एरबिल शहर में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि ज्यादातर ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को हवा में ही रोक लिया गया, जिससे किसी भी अमेरिकी बेस पर कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और सभी सैनिक सुरक्षित हैं। दूसरी तरफ, ईरान का कहना था कि केरमानशाह प्रांत में हुए अमेरिकी हमले में उनके चार जवान मारे गए हैं। इसके अलावा, ईरानी मीडिया और रेड क्रेसेंट ने यह भी दावा किया कि सिरिक के कुहेस्ताक इलाके में एक शादी समारोह पर अमेरिकी हमला हुआ, जिसमें 50 से 68 लोग घायल हो गए और एक बच्चे समेत 4 से 5 लोगों की मौत हो गई। हालांकि अमेरिकी सेना ने नागरिकों को निशाना बनाने की बात से साफ इनकार किया है।
क्षेत्रीय सहयोगियों की प्रतिक्रिया और सुरक्षा इंतजाम
इस पूरे तनाव के बीच खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा बढ़ाने के लिए मजबूर होना पड़ा। जॉर्डन की सेना ने हवा में ही 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराया। बहरीन के एयर डिफेंस सिस्टम ने भी कई ईरानी ड्रोन्स को नष्ट कर दिया, जबकि कुवैत में हमलों की वजह से एक रिहायशी इलाके में आग लग गई थी जिसे वहां के सुरक्षा बलों ने नियंत्रित किया। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के इलाकों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने नागरिक हताहतों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे बर्बर अपराध बताया। वहीं ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कसम खाई कि वे इसका बहुत जल्द और बड़े पैमाने पर कड़ा जवाब देंगे। कतर के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ईरान के इस तरह के पलटवार से शांति स्थापित करने के प्रयासों को तगड़ा झटका लगा है और इसके लिए सीधे तौर पर तेहरान जिम्मेदार है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने साफ किया कि इस पूरे मामले को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की जिम्मेदारी अब भी ईरान के ऊपर ही है। खाड़ी देशों में रह रहे प्रवासियों और भारतीय नागरिकों के बीच इस तनाव को लेकर चिंता का माहौल जरूर है, क्योंकि किसी भी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का सीधा असर रोजगार और सुरक्षा पर पड़ सकता है।