अमेरिका और ईरान में छिड़ी जंग, होर्मुज जलडमरूमध्य में हमलों से हालात गंभीर, कुवैत और जॉर्डन तक पहुँची आँच

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 1 सितंबर और 2 सितंबर 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दोनों देशों की सेनाओं के बीच ताबड़तोड़ हमले हुए। इस सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान के कुहेस्तक इलाके में एक बड़ी आवासीय इमारत पर हमला हुआ, जिससे वहाँ भारी नुकसान की खबर सामने आई है। आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं क्योंकि इस हिंसा में आम नागरिकों के हताहत होने की बात भी सामने आ रही है।
कुहेस्तक में शादी समारोह पर हमला और नागरिकों की जान
मिली जानकारी के अनुसार, 1 सितंबर की रात से 2 सितंबर के बीच अमेरिका की तरफ से ईरान के हॉर्मोज़गान प्रांत के कुहेस्तक इलाके में एयरस्ट्राइक की गई। इस हमले में एक रिहायशी इमारत और पास ही बना टेलीकॉम टावर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि जिस रिहायशी इमारत पर हमला हुआ, वहाँ एक शादी का समारोह चल रहा था। इस भयानक हादसे में 4 साल के बच्चे और एक 16 साल के किशोर सहित कम से कम पाँच लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा इस हमले में 50 से 68 लोग घायल भी हुए हैं, जिनका इलाज चल रहा है। इस जोरदार धमाके के बाद हॉर्मोज़गान प्रांत के कई हिस्सों में बिजली गुल हो गई और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए।
अमेरिकी सेना CENTCOM का पक्ष और ईरानी तीखी प्रतिक्रिया
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि की है कि उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर कई हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री जहाजों, बारूदी सुरंग बिछाने वाले उपकरणों और संचार बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैनिकों और कमर्शियल जहाजों पर हो रहे हमलों के जवाब में की गई है। इससे पहले 30 अगस्त को भी अमेरिकी सेना ने ईरान के रॉकेट लॉन्चर्स पर हमला किया था। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि उनकी सेना जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाती है।
दूसरी तरफ, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई और सरकारी प्रवक्ता फातेमेह मोहजेरानी ने शादी समारोह पर हुए इस हमले को युद्ध अपराध और बर्बर कार्रवाई बताया है। ईरान ने इसका कड़ा जवाब देने की कसम खाई है। सीरिक काउंटी के गवर्नर रेजा शाहिदियान और हॉर्मोज़गान प्रांत के डिप्टी गवर्नर अहमद नफीसी ने स्थानीय लोगों को आधिकारिक तौर पर इस नुकसान की जानकारी दी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अपनी हरकतें जारी रखीं, तो अमेरिका और भी कड़े कदम उठाएगा।
पड़ोसी देशों कुवैत, जॉर्डन और बहरीन तक पहुँची जंग की आँच
ईरान ने अमेरिकी हमलों का बदला लेने के लिए क्षेत्रीय देशों में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगियों पर मिसाइलों और ड्रोनों से पलटवार किया। खबरों के मुताबिक, जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों, कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस और बहरीन के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया गया। कुवैत के अधिकारियों ने बताया कि एक ईरानी ड्रोन सीधे रिहायशी परिसर में आकर गिरा। वहीं जॉर्डन की सेना ने आसमान में ही कई बैलिस्टिक मिसाइलों को रोक लिया और उन्हें नष्ट कर दिया। कतर, जिसने पहले दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की थी, ने ईरान के इन जवाबी हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इस तबाही के लिए पूरी तरह से ईरान की कानूनी जिम्मेदारी बनती है। इस पूरे तनाव से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों की धड़कनें तेज हो गई हैं।