US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के तनाव से तेल की कीमतें बढ़ीं, क्रूड ऑयल में भारी उछाल.

दुनियाभर के बाजारों में इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का सीधा असर देखने को मिल रहा है। इस तनाव की वजह से तेल की कीमतों में अचानक बहुत ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आम आदमी की जेब पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है क्योंकि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं। बुधवार, 24 सितंबर 2026 को बाजार में Brent crude के दाम में 3.94% की तेजी आई और यह बढ़कर $102.27 प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसके अलावा, West Texas Intermediate (WTI) भी 2.45% की तेजी के साथ $91.48 प्रति बैरल पर बंद हुआ।
स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज में हुई घटना से डरे बाजार
ओमान की नौसेना के मुताबिक, Strait of Hormuz में एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और करीब 20 से ज्यादा नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना के बाद से ही पूरी दुनिया के तेल बाजार में डर का माहौल बन गया है कि कहीं सप्लाई रुक न जाए। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही खींचतान अब और ज्यादा खतरनाक रूप लेती जा रही है। न्यूयॉर्क में चल रही यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने खुलकर कहा कि उनका देश आतंकवाद का शिकार है और वे अमेरिका के किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक इस सात महीने पुराने विवाद को खत्म करने के लिए कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।
अप्रत्यक्ष बातचीत और शांति का प्रस्ताव
हालांकि दोनों देशों के बीच जुबानी जंग जारी है, लेकिन मंगलवार, 23 सितंबर को दोनों देशों के अधिकारियों के बीच परदे के पीछे बातचीत भी हुई। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन ईरान के एक बड़े अधिकारी का कहना था कि तेहरान की तरफ से रखे गए शांति प्रस्ताव पर अभी भी कई बातों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ईरान के इस शांति प्रस्ताव में 60 दिन का क्षेत्रीय युद्धविराम, स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज को दोबारा खोलना और विदेश में जमी हुई ईरानी संपत्तियों को वापस जारी करना जैसी मुख्य बातें शामिल हैं। इस पूरे मामले पर अभी भी विचार-विमर्श का दौर चल रहा है और कोई पक्की सहमति नहीं बन पाई है।
नई पाबंदियां और सैन्य गतिविधियां तेज
तनाव को और बढ़ाने का काम अमेरिका के नए एविएशन प्रतिबंधों ने किया है जो बुधवार से लागू हो गए हैं। इन नए नियमों के आने के बाद ईरानी विमानों की उड़ानों पर दुनियाभर में असर पड़ा है और कई उड़ानों को रद्द करना पड़ा है। अमेरिकी सेना अभी भी स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज इलाके में पहरा दे रही है और वहां नाकाबंदी की वजह से करीब 115 कमर्शियल जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा है। दूसरी तरफ, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो इस युद्ध का दायरा बदल सकता है और लड़ाई हिंद महासागर तक भी पहुंच सकती है। अमेरिका ने भी ईरान पर अपने प्रतिबंधों को साल 2031 तक बढ़ा दिया है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की एक तथ्यान्वेषी टीम ने पिछले साल फरवरी में ईरान पर हुए हमलों के दौरान अमेरिकी सेना द्वारा युद्ध अपराध किए जाने की संभावना जताई है, जिससे स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो गई है। अमेरिकी नौसेना के USS Abraham Lincoln कैरियर स्ट्राइक ग्रुप से जुड़ी जगहों पर सैनिकों के मानसिक तनाव और आत्महत्या की कोशिशों की खबरें भी सामने आ रही हैं।