US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को छह महीने पूरे, अल जज़ीरा की रिपोर्ट में सामने आए बड़े तथ्य

Aanya28 August 20263 min read22 viewsWorld
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे विवाद को छह महीने पूरे, अल जज़ीरा की रिपोर्ट में सामने आए बड़े तथ्य

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य और आर्थिक संघर्ष को 28 अगस्त 2026 को पूरे छह महीने हो गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर मशहूर मीडिया संस्थान Al Jazeera ने दो अलग-अलग और दिलचस्प राय सामने रखी हैं, जिसमें दोनों देशों के बीच जारी तनाव और उसके असर पर खुलकर बात की गई है। यह संघर्ष इस साल 28 फरवरी को इस्राइल और गाजा के युद्ध के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद जून 2025 में 12 दिन का युद्ध भी हुआ था। इस पूरे घटनाक्रम का असर अब खाड़ी देशों और वहां रहने वाले आम लोगों के साथ-साथ प्रवासियों पर भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है, क्योंकि क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

विशेषज्ञ महजोब जुवैरी की रिपोर्ट और ईरान की आर्थिक स्थिति

शिक्षाविद और वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक Mahjoob Zweiri ने अपने लेख 'Six months on, Iran is still standing, but survival is becoming more costly' में बताया है कि हालांकि ईरान ने अभी तक खुद को संभाले रखा है, लेकिन इस तरह से टिके रहना अब देश के लिए बहुत महंगा साबित हो रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान द्वारा 28 फरवरी को लागू किए गए नौसैनिक नाकेबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के फैसले से देश के व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी अब इस आर्थिक बदहाली को सबके सामने स्वीकार करना शुरू कर दिया है। उन्होंने कम होते आयात का हवाला देते हुए देश की स्थिति मजबूत रहते हुए ही इस विवाद का कोई हल निकालने की वकालत की है। इसके अलावा, देश के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की हत्या और उनके बेटे Mojtaba Khamenei को बिना किसी सार्वजनिक घोषणा के नया पद सौंपे जाने के बाद से राजनीतिक माहौल में भी लगातार अस्थिरता बनी हुई है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

अमेरिकी रणनीति और अदोल्फो फ्रेंको का नजरिया

दूसरी तरफ, रिपब्लिकन राजनीतिक रणनीतिकार और विदेश नीति विश्लेषक Adolfo Franco ने अपने लेख 'Six months on, Trump’s Iran strategy is starting to pay off' में यह दावा किया है कि अमेरिकी प्रशासन की सोची-समझी रणनीति अब रंग ला रही है और इससे तेहरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इस रणनीति का मुख्य मकसद किसी युद्ध को जल्दी खत्म करना नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था को धीरे-धीरे कमजोर करना है। सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, टैंकरों का यातायात या तो 80% से ज्यादा डायवर्ट हो चुका है या फिर उन्हें 'डार्क' श्रेणी में रखा गया है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण कमजोर हुआ है। फ्रेंको ने जून महीने के समझौता ज्ञापन (MoU) के टूटने का हवाला देते हुए यह भी कहा कि तेहरान पुराने समझौतों का सम्मान करने में पूरी तरह नाकाम रहा है।

क्षेत्रीय सहयोग और खाड़ी देशों में कूटनीतिक प्रयास

हाल के घटनाक्रमों में, ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत अपने पड़ोसी देशों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोले जाने की संभावना को लेकर इस समय ईरान और कतर के बीच बातचीत का दौर जारी है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थ भी यह कोशिश कर रहे हैं कि किसी तरह अमेरिका के साथ रुकी हुई बातचीत को फिर से पटरी पर लाया जाए, ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके और व्यापारिक गतिविधियां सामान्य हो सकें। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए भी यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तनाव का सीधा असर रोजगार, व्यापार और यात्रा पर पड़ता है।

Share:

Comments

Leave a comment