अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार, शांति वार्ता और सैन्य टकराव के बीच फंसी राह

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार है। कतर की मध्यस्थता और जेडी वेंस की कोशिशों के बावजूद परमाणु मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है।

Gautam Sahu30 October 20262 min read0 viewsWorld
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बरकरार, शांति वार्ता और सैन्य टकराव के बीच फंसी राह

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीनों से जारी संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां शांति वार्ता की उम्मीदें और सैन्य टकराव का खतरा दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी किसी भी औपचारिक समाधान के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

30 अक्टूबर 2026 तक की जानकारी के अनुसार, कतर के मध्यस्थ एक बार फिर तेहरान पहुंचे हैं ताकि वाशिंगटन के साथ समन्वय कर राजनयिक प्रयासों को तेज किया जा सके। इससे पहले 25 अक्टूबर को कतर द्वारा पेश किए गए शांति प्रस्ताव के ड्राफ्ट को ईरानी अधिकारियों ने खारिज कर दिया था, जिसमें परमाणु प्रावधानों को लेकर चिंता जताई गई थी।

अमेरिका के भीतर भी संपर्क बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रज़ाई को पत्र भेजकर सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया है। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के मुताबिक रज़ाई, सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण जरिया हैं, हालांकि रज़ाई की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया है।

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संपर्क की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने इसे व्यापक शांति वार्ता के बजाय ईरान के लिए चिकित्सा आपूर्ति पर केंद्रित बताया। ट्रंप ने 30 अक्टूबर को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह संघर्ष जल्द खत्म हो जाएगा, बशर्ते ईरान परमाणु हथियारों के खिलाफ गारंटी दे। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि बड़े अमेरिकी हमलों का विकल्प अभी भी खुला है।

दूसरी ओर, ईरान ने बातचीत शुरू करने से पहले शत्रुता को पूरी तरह समाप्त करने, जमी हुई संपत्ति वापस करने और नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की मांग की है। विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने बुधवार को बताया कि तेहरान मध्यस्थों के जरिए मिले प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है और संघर्ष खत्म करने के लिए अपना 'सात दिवसीय प्लान' भी पेश किया है।

क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने 30 अक्टूबर को दावा किया कि उन्होंने 'अनधिकृत रूट' अपनाने के आरोप में होर्मुज जलडमरूमध्य में दो तेल टैंकरों को रोका है। इससे पहले 29 अक्टूबर को ब्रिटिश नेवी मॉनिटर ने एक टैंकर पर मिसाइल हमले की रिपोर्ट दी थी, जबकि ईरान ने दावा किया कि चार जहाज समुद्री माइन्स की चपेट में आए हैं।

इन दावों के विपरीत, अमेरिकी सेंटकॉम प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने 30 अक्टूबर को कहा कि ईरान की नौसेना 'तबाह' हो चुकी है और शिपिंग लेन पूरी तरह सुरक्षित हैं।

3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर अधिकारियों ने क्षेत्रीय सहयोगियों को चेतावनी दी है कि मतदान के तुरंत बाद सैन्य कार्रवाई बढ़ सकती है या ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल गतिरोध बरकरार है क्योंकि अमेरिका परमाणु सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि ईरान आर्थिक प्रतिबंध और नाकाबंदी हटने तक परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने को तैयार नहीं है।

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