मिडटर्म चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई की तैयारी में अमेरिका और ईरान के साथ लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का संकेत
अमेरिका ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है और मिडटर्म चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई पर विचार कर रहा है।

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और अब अमेरिका इस टकराव को लंबे समय तक खींचने की तैयारी कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर आर्थिक दबाव तेज कर रहा है और साथ ही आगे की सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर रहा है।
फाइनेंशियल टाइम्स की 23 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी अब इस स्टैंडऑफ के लंबे समय तक चलने की उम्मीद कर रहे हैं। पहले ऐसा माना जा रहा था कि यह विवाद कुछ हफ्तों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अब यह संघर्ष नौवें महीने में प्रवेश कर रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 अक्टूबर 2026 को बताया कि फिलहाल तेहरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने संकेत दिया कि इस विवाद में नए घटनाक्रम 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद सामने आ सकते हैं। ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह चुनाव से पहले सैन्य हमलों का सहारा नहीं लेंगे।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने कहा कि यह गतिरोध एक साल तक खिंच सकता है। उन्होंने इसके पीछे ईरान के परमाणु पदार्थ और यूरेनियम संवर्धन पर किसी औपचारिक समझौते की कमी को वजह बताया। वाल्ट्ज ने यह भी पुष्टि की कि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी अनिश्चित काल तक जारी रखने के लिए तैयार है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के आंकड़ों के अनुसार, इस नाकाबंदी की वजह से 100 दिनों के भीतर कम से कम 25 अरब डॉलर के ईरानी कच्चे तेल का निर्यात रुक गया है। पूर्व अमेरिकी ट्रेजरी अधिकारी मियाद मलेकी ने बताया कि ईरान की 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों को फ्रीज कर उस पर और वित्तीय दबाव बनाया जा रहा है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इन कदमों के असर को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि नाकाबंदी के कारण दक्षिणी समुद्री रास्तों से होने वाला ईरान का 75 से 80 प्रतिशत व्यापार ठप हो गया है। वहीं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रजाई ने भी नाकाबंदी से हुए आर्थिक नुकसान को माना है।
दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर हामिदरेजा हाजीबाबाए ने 23 अक्टूबर को कहा कि अगर हमला हुआ तो देश की सेना अमेरिकी और क्षेत्रीय ठिकानों पर 'फादर ऑफ मिसाइल्स' जैसे हथियार का इस्तेमाल करेगी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने 20 अक्टूबर को चेतावनी दी थी कि किसी भी सैन्य हमले का जवाब दिया जाएगा।
क्षेत्रीय हालात भी तनावपूर्ण हैं और इराक व पाकिस्तान के साथ सीमाएं बंद होने से ईरान का व्यापार और सिमट गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर ने तेहरान का दौरा कर सीमा पहुंच पर चर्चा की, लेकिन फिलहाल केवल गैस टैंकरों और जल्दी खराब होने वाले सामानों की आवाजाही ही सीमित तौर पर हो रही है।
खबरों के मुताबिक, अमेरिका मिडटर्म चुनाव के बाद कई दिनों तक चलने वाले सैन्य अभियान पर विचार कर रहा है। इसमें ईरान के मिसाइल, ड्रोन केंद्रों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु स्थलों को निशाना बनाया जा सकता है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अमेरिकी चुनाव चक्र के बाद नए हमले की संभावना जताई है।