अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र और मिस्र ने की अपील
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख और मिस्र ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को कम करने की अपील की है ताकि क्षेत्र में हालात बेकाबू न हों।

काहिरा: संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सोमवार को चेतावनी दी है कि अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिति बेकाबू हो सकती है। उन्होंने कहा कि ईरान और खाड़ी देशों के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव के नतीजे कल्पना से परे होंगे और इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा।
गुटेरेस ने काहिरा में बातचीत के दौरान अधिकतम संयम बरतने और राजनयिक समाधान निकालने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से बाब अल-मंडब और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन के अधिकारों को बहाल करने की मांग की है।
मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलत्ती ने 26 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि काहिरा पूरी सैन्य जंग को रोकने के लिए तेहरान, वॉशिंगटन और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ रोजाना संपर्क में है। गुटेरेस ने संवाद को बढ़ावा देने के लिए मिस्र द्वारा किए जा रहे मध्यस्थता के प्रयासों की सराहना की है।
इसी बीच मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला यमन में हूती विद्रोहियों द्वारा बढ़ाए गए हमलों के बाद लिया गया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान-अमेरिका के बीच संभावित समझौते पर चर्चा के लिए सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के प्रतिनिधिमंडलों ने तेहरान में ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाएई ने बताया कि इन बातचीत का उद्देश्य गंभीर सुरक्षा खतरों से निपटना है।
25 अक्टूबर 2026 को कतरी मध्यस्थों ने भी तनाव कम करने के लिए अमेरिका के साथ समन्वय किया। यह सारी हलचल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 23 अक्टूबर को संभावित सैन्य कार्रवाई पर दिए गए बयानों के बाद शुरू हुई है।
खबरों के मुताबिक पेंटागन ने ईरान के परमाणु, ऊर्जा और सैन्य ठिकानों की विस्तृत टारगेट लिस्ट तैयार कर ली है। अमेरिकी सेना आदेश मिलने पर 96 घंटों के भीतर ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि धमकियों के बावजूद ईरान का रुख नहीं बदला है। दूसरी तरफ इस मौजूदा संघर्ष के बीच इजरायली नेतृत्व ने भी अपनी बयानबाजी तेज कर दी है।