परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच ठनी, कतर और पाकिस्तान बीच-बचाव की कोशिश में जुटे

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों के मुद्दे पर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 21 अक्टूबर 2026 को पुष्टि की कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत की संभावनाओं को लेकर कई देशों के संपर्क में है। रूबियो ने साफ किया कि कोई भी समझौता तभी होगा जब वह तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी तरह रोक सके।
रूबियो ने कहा कि जब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पद पर हैं, ईरान को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हो रहे हमलों की वजह से शांति समझौता करना मुश्किल हो रहा है। कतर की मध्यस्थता की कोशिशों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि शर्तों पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप का होगा।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वॉशिंगटन ईरान को परमाणु प्रसार से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई करने को तैयार है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के इस रवैये को खारिज कर दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि जब तक अमेरिकी धमकी और प्रतिबंध रहेंगे, ईरान बातचीत नहीं करेगा।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऐलान किया है कि जब तक वॉशिंगटन इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन सहित कुछ खास शर्तों को पूरा नहीं करता, हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा। वहीं, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ई ने कहा कि ईरान देश से संवर्धित यूरेनियम नहीं हटाएगा। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा कि जलमार्ग खोलने के लिए अमेरिका को सात शर्तों को पूरा करना होगा।
फिलहाल पाकिस्तान और कतर की अगुवाई में अप्रत्यक्ष बातचीत चल रही है। एक प्रस्तावित ढांचे के तहत कतरी बैंकों में जमा ईरान के करीब 6 अरब डॉलर के ब्याज को छोड़ने के बदले में ईरानी परमाणु केंद्रों पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण की बात कही गई है।
इन चर्चाओं के बीच तनाव तब और बढ़ गया जब दक्षिणी हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर नौसेना माइन से टकराकर आग की चपेट में आ गया। ईरान की मांग है कि किसी भी राजनयिक प्रगति के लिए अमेरिका को पहले प्रतिबंध हटाने होंगे और क्षेत्रीय दुश्मनी खत्म करनी होगी।