अमेरिका और ईरान के बीच हुई लंबी बातचीत, मध्यस्थों के जरिए बनी बात

संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के माध्यम से लंबी बातचीत हुई है। अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff ने मंगलवार को इस चर्चा को बहुत ही सकारात्मक और आशाजनक बताया है। इस बैठक को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा हो रही है क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय से तनाव चल रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थों ने दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे दिन संदेशों का आदान-प्रदान किया गया।
अमेरिका और ईरान की बैठक के मुख्य बिंदु
अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर उन्होंने ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ लंबी चर्चा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दौर आगे चलकर दोनों देशों के लिए बहुत ही रचनात्मक साबित होगा और मध्यस्थ इस दिशा में अपना काम लगातार जारी रखेंगे। वहीं दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने भी इस मुलाकात की पुष्टि की है।
ईरान के सरकारी प्रसारणकर्ता IRIB की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक विशेष दूत Steve Witkoff के अनुरोध पर ही आयोजित की गई थी। इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने हिस्सा लिया था। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्री ने इस मुलाकात के दौरान अपनी कुछ मुख्य शर्तें रखीं। इन शर्तों में स्ट्रेट ऑफ़ हार्मुज को फिर से खोलने की बात शामिल थी, जिसके तहत नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाने, ईरान की जमी हुई संपत्तियों को रिहा करने और लेबनान समेत सभी मोर्चों पर चल रहे युद्ध को समाप्त करने की मांग की गई है।
पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान
इस पूरी बैठक को लेकर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने भी मंगलवार को एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner उस अमेरिकी टीम का हिस्सा थे जिन्होंने ईरान के साथ डील पर काम कर रहे मध्यस्थों से मुलाकात की थी। यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली थी और इसे एक बहुत ही अच्छी बैठक बताया गया।
यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान Donald Trump ने कहा कि यह चर्चा बहुत अच्छी रही और यह ठीक एक घंटा पहले ही समाप्त हुई थी। उन्होंने आगे कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि कोई देश इस तरह के समझौते से क्यों बचना चाहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक तरफ पूरी बर्बादी का रास्ता है और दूसरी तरफ देश के महान बनने की पूरी संभावना है। इस बैठक के बाद अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।