अमेरिका और ईरान में फिर बढ़ा तनाव, मंडराने लगे अमेरिकी ड्रोन और हमले की आशंका हुई तेज

Praggya Singh sabal1 September 20263 min read15 viewsWorld
अमेरिका और ईरान में फिर बढ़ा तनाव, मंडराने लगे अमेरिकी ड्रोन और हमले की आशंका हुई तेज

वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक बार फिर से हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जॉर्डन में सैन्य ठिकानों पर हुए हालिया ईरानी हमलों से बेहद गुस्से में हैं। अमेरिका की तरफ से जल्द ही ईरान पर एक बड़ा हमला किए जाने की आशंका जताई जा रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि वह ईरान को इस हरकत का करारा सबक सिखाएंगे और बहुत जोरदार हमला किया जाएगा। दूसरी तरफ, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का दावा है कि ट्रंप की धमकी के बाद उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने पूर्वी होर्मुज जलडमरूमध्य के ऊपर एक अमेरिकी MQ-9 Drone को रोक लिया है। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर भड़का सैन्य तनाव

अल जजीरा और सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग एक महीने की शांति के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव एक बार फिर से अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है। पिछले कुछ महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच कई बार संघर्ष विराम समझौते हुए और टूटे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि ये तमाम सैन्य कार्रवाईयां ईरान की तरफ से मिलने वाली धमकियों और हमलों के जवाब में की जा रही हैं। पिछले महीनों के दौरान 25 May, 27 May, 30 May, 31 May और जून तथा जुलाई के कई हफ्तों में अमेरिका ने ईरान के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस और ड्रोन ठिकानों को कई बार निशाना बनाया था। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देशों में अमेरिकी सेना के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए और कमर्शियल शिपिंग के रास्तों को भी बाधित किया।

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पूर्व अधिकारियों और वैश्विक बाजार की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार John Bolton की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने ईरानी तेल के निर्यात पर अमेरिकी रोक को बड़ी जीत बताया है और कहा है कि इसका असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर साफ तौर पर पड़ रहा है। उनका यह भी कहना है कि चीन अभी भी ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार बना हुआ है और अपने बैंकिंग सिस्टम के जरिए ईरान की आर्थिक मदद कर रहा है, जिस पर रोक लगनी चाहिए। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ओवल ऑफिस में बातचीत के दौरान इस पूरे संघर्ष को अमेरिका के लिए एक छोटी लड़ाई करार दिया है। इस बीच, सेना की 82nd Airborne Division के परिवारों को जानकारी दी गई है कि मध्य पूर्व में उनकी तैनाती 2027 तक चल सकती है और नॉर्थ कैरोलिना के फोर्ट ब्रैग से अधिकारियों ने पत्र लिखकर यह स्पष्ट किया है कि तैनाती का कुल समय 12 months तक का हो सकता है।

आर्थिक दबाव और बातचीत की कोशिशें

अमेरिकी वित्त सचिव Scott Besant ने नॉर्थ कैरोलिना में दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान कहा कि ट्रंप प्रशासन के इस नए आर्थिक दबाव अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान को वापस बातचीत की मेज पर लाना है। अमेरिकी प्रशासन की स्पष्ट नीति है कि ईरान को अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ना होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते को व्यापार और जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह खुला रखना होगा। इन तमाम सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप मंगलवार को देश के छोटे, मध्यम और बड़े तेल रिफाइनर और डिस्ट्रीब्यूटर के साथ बैठक करने वाले हैं, जिसमें आंतरिक सचिव Doug Burgum और ऊर्जा सचिव Chris Wright भी शामिल होंगे। खाड़ी देशों में लगातार बढ़ रहे इस तनाव का असर वहां की आम जिंदगी और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

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