अमेरिका और ईरान के बीच फिर से भड़की जंग, प्रवासी ईरानी फंसे बड़ी मुश्किल में और सख्त हुए नियम.

1 सितंबर 2026 को दुनिया भर में रह रहे ईरानी प्रवासी एक बहुत ही अजीब और कठिन दौर से गुजर रहे हैं। वे एक तरफ तो अपने देश की सरकार यानी तेहरान के शासन का विरोध कर रहे हैं और दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई जंग के भी खिलाफ हैं। इस अंदरूनी उठापटक के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं और दोनों देशों के बीच राजनैतिक और सैन्य टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई गोलीबारी
बीते 31 अगस्त 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से गोलीबारी शुरू हो गई। इस घटना ने उस एक महीने की शांति को पूरी तरह से खत्म कर दिया जो दोनों देशों के बीच बनी हुई थी। इस तनाव के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य को सबसे बड़ा खतरा माना जा रहा है। इस सैन्य तनाव के साथ ही अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए हैं जिनका सीधा असर आम ईरानी नागरिकों की जिंदगी पर पड़ रहा है।
जुप्लीगो और ईटीएस के नियमों में बदलाव
नए अमेरिकी प्रतिबंधों के असर से जनरल लाइसेंस जी को निलंबित कर दिया गया है। इसके बाद डुओलिंगो ने ईरान में रहने वाले लोगों या ईरानी पहचान पत्र इस्तेमाल करने वालों के लिए अपना अंग्रेजी टेस्ट देना बंद कर दिया है। इसी तरह एजुकेशनल टेस्टिंग सर्विस यानी ईटीएस ने भी इन नियमों का पालन करने की बात कही है। हालांकि संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरानी नागरिक देश की सीमा के बाहर जाकर परीक्षा दे सकते हैं।
बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन
तनाव के इस माहौल के बीच 1 सितंबर 2026 को बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में कूटनीतिक प्रयासों पर मुख्य रूप से चर्चा की गई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने सम्मेलन में कहा कि यदि अमेरिका जून के उस अंतरिम समझौते पर वापस लौटता है जिससे hostilities यानी शत्रुता को रोका जा सके, तो ईरान तुरंत इसका जवाब देगा। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका की तरफ से दबाव और धमकियों की नीतियां जारी रहीं तो कूटनीति की सफलता पर पानी फिर सकता है। वहीं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस सम्मेलन में हिस्सा लिया और ईरानी जनता के प्रति अपना समर्थन जताते हुए उनके राष्ट्रीय हितों की रक्षा की बात कही।
पड़ोसी देशों को ईरान की सेना की कड़ी चेतावनी
इसी बीच 1 सितंबर 2026 को ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने मध्य पूर्व के पड़ोसी देशों को एक बहुत कड़ी चेतावनी जारी की है। ईरानी सेना ने इन देशों से साफ कह दिया है कि वे अपने देश की जमीन या एयरस्पेस का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान के खिलाफ ऑपरेशन के लिए न करने दें। सेना ने धमकी दी है कि अगर ऐसा हुआ तो और भी गंभीर कदम उठाए जाएंगे और ईरान किसी भी हमले की जड़ या स्रोत को ही निशाना बनाएगा।