Gulf Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, फारसी खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर हमला

Praggya Singh sabal1 September 20263 min read43 viewsUAE
Gulf Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा, फारसी खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर हमला

अमेरिका और ईरान के बीच खाड़ी देशों के पास तनाव काफी ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ बहुत कड़ी सैन्य कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि हालिया संघर्षों के बाद वह ईरान को करारा जवाब देंगे। हालांकि उन्होंने बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने के खतरे को कम करके आंका, लेकिन उन्होंने ईरान को एक विफल राष्ट्र बताया है। अमेरिका का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में लगातार उथल-पुथल मची हुई है और आम लोगों के साथ-साथ वहां रहने वाले प्रवासियों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

हार्मूज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों पर हमले

यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब 1 सितंबर 2026 को फारसी खाड़ी के Strait of Hormuz में दो बड़े तेल टैंकरों पर हमले किए गए। इनमें से एक तेल टैंकर Saudi Arabia का था और दूसरा टैंकर South Korea का था। इन हमलों के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इन घटनाओं से खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों और भारत से आने-जाने वाले लोगों के बीच भी सुरक्षा को लेकर डर का माहौल बन गया है, क्योंकि इस रास्ते से व्यापार और तेल की आवाजाही पर सीधा असर पड़ता है।

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अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई

इससे पहले August 31, 2026 के आखिरी हफ्ते में अमेरिकी सेना ने Larak Island पर हवाई हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के रॉकेट लॉन्चर और समुद्री ड्रोन्स को निशाना बनाया गया था। ईरानी अधिकारियों के अनुसार अमेरिकी कार्रवाई में दो से तीन लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन की तरफ मिसाइलें दागीं और रविवार को UAE पर एक ड्रोन से हमला किया। ईरान का दावा था कि उसने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, लेकिन जॉर्डन और यूएई दोनों देशों ने साफ किया कि उन हथियारों को हवा में ही रोक लिया गया या फिर उनसे कोई नुकसान नहीं हुआ। इस बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने सोशल मीडिया पर एक एआई-जनरेटेड पोस्ट शेयर किया, जिसमें खार्ग द्वीप पर हमलों को दिखाया गया था।

आर्थिक प्रतिबंध और ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने बताया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों की वजह से ईरान बौखला गया है और लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है। अमेरिका की रणनीति है कि वह लक्षित हमलों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूद बिछाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करे। साथ ही जो देश ईरान से कच्चा तेल खरीद रहे हैं, उन पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। दूसरी ओर, किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में बोलते हुए ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा कि यदि अमेरिका जून के समझौता ज्ञापन की शर्तों पर वापस लौटता है तो ईरान भी तुरंत वैसा ही जवाब देगा। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय ने हमलों का कड़ा जवाब देने की बात कही है और संसद के स्पीकर Mohammad Baqer Qalibaf ने चेतावनी दी है कि संघर्ष के अगले चरणों में और अधिक सैन्य कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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