संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और ईरान आमने-सामने, कूटनीति के साथ मिल रही है युद्ध की धमकी.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक अजीब स्थिति बनी हुई है, जहाँ एक तरफ बातचीत की टेबल पर डीलिंग चल रही है तो दूसरी तरफ खुली धमकियों का दौर भी जारी है। न्यूयॉर्क में चल रहे इस महासम्मेलन के दौरान 22 सितंबर 2026 और 23 सितंबर 2026 को दोनों देशों के बीच परोक्ष यानी इनडायरेक्ट बातचीत हुई। इस पूरी कूटनीतिक कोशिश में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman bin Al Thani के साथ-साथ पाकिस्तान ने भी मध्यस्थ की बड़ी भूमिका निभाई। अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff ने इस बात की पुष्टि की कि मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत कराने में जुटे रहे, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अधिकारियों के बीच तीन घंटे चली एक बैठक को काफी उत्पादक बताया। वहीं दूसरी ओर, ईरानी अधिकारियों का कहना रहा कि उनकी यह बातचीत पूरी तरह से मध्यस्थों के जरिए ही हो रही थी।
सख्त पाबंदियां और उड़ानों पर असर
बातचीत के माहौल के बावजूद जमीन पर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने संयुक्त राष्ट्र के भाषण के दौरान साफ शब्दों में कहा कि यदि लगभग सात महीने से चल रहे इस युद्ध को खत्म करने के लिए कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान का पूरी तरह से नामोनिशान मिटा दिया जाएगा। इसी तनाव के बीच अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent के नेतृत्व में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 23 सितंबर को ईरान के सिविल एविएशन नेटवर्क पर नए सेकेंडरी प्रतिबंध लगा दिए। इन पाबंदियों का असर यह हुआ कि ईरान से बगदाद और मस्कट जाने वाली सभी उड़ानों को रद्द करना पड़ा। इस पूरी अमेरिकी नीति को आगे बढ़ाने में विदेश मंत्री Marco Rubio और Jared Kushner जैसे बड़े अधिकारी भी शामिल हैं।
ईरान की शर्तें और आगे की चेतावनी
ईरान की तरफ से राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने शांति के लिए अपनी शर्तें दुनिया के सामने रखी हैं। तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाती है, ईरान की जमी हुई संपत्ति यानी फ्रोजन एसेट्स को रिलीज किया जाता है और प्रतिरोध मोर्चों पर युद्ध बंद होता है, तभी बात आगे बढ़ सकती है। ईरान ने यहाँ तक कहा कि यदि ये मांगें मान ली जाती हैं, तो वह महज सात दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोल देगा। ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को उनकी राजनीतिक लाचारी बताया और चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने आगे कोई भी हमला किया, तो उसका बहुत ही कड़ा और असीमित जवाब दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने साफ किया कि ईरान को बातचीत करने और साथ ही युद्ध लड़ने में कोई विरोधाभास नजर नहीं आता है, क्योंकि दोनों देश इस समय कूटनीतिक समझौतों और संभावित संघर्ष के बीच का रास्ता तलाश रहे हैं।