अमेरिका और इसराइल युद्ध के छह महीने पूरे, दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों और बिजली के सामानों पर पड़ा भारी असर

Nura Basta28 August 20263 min read22 viewsEnglish
अमेरिका और इसराइल युद्ध के छह महीने पूरे, दुनिया भर में खाने-पीने की चीजों और बिजली के सामानों पर पड़ा भारी असर

अमेरिका और इसराइल के गठबंधन और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अपने छह महीने पूरे कर चुका है। इस जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी और अब 28 अगस्त 2026 तक आते-आते इस संघर्ष ने दुनिया भर के समुद्री रास्तों, ऊर्जा आपूर्ति और खाने-पीने की सुरक्षा पर बहुत बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। इस भयानक तनाव की वजह से दुनिया भर के देशों में आम आदमी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं और इसका असर हर आम आदमी की जेब पर साफ दिखाई दे रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी मुसीबत

इस पूरी लड़ाई के दौरान दुनिया का बेहद अहम रास्ता यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से बंद हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के आंकड़ों के मुताबिक, 26 अगस्त तक जहाजों पर कुल 70 हमले हो चुके हैं और इसमें 19 नाविकों की जान जा चुकी है। इस रास्ते के बंद होने की वजह से दुनिया भर में मिलने वाले कुल तेल का लगभग चौथाई हिस्सा और प्राकृतिक गैस (LNG) का पाँचवां हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। तेल और गैस की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया में खलबली मच गई है और व्यापार करने के तौर-तरीके बदल गए हैं।

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सर्दियों और फसलों पर असर

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेजाई ने हाल ही में बयान दिया था कि ओमान के माध्यम से बातचीत के बाद ईरान इस रास्ते को दोबारा खोलने की कुछ शर्तें बना रहा है। दूसरी तरफ, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रोन ने साफ किया है कि अमेरिका अभी ईरान से कोई बातचीत नहीं कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने भी यह पुख्ता किया है कि जब तक ईरान सही तरीके से बात नहीं करता, तब तक अमेरिकी आर्थिक अभियान जारी रहेगा।

ऊर्जा और यातायात की इन समस्याओं की वजह से खेती से जुड़ी चीजों के दामों में बहुत उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। दुनिया भर में नाइट्रोजन खाद का 25 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज रास्ते से होकर जाता है, जिसके कारण फरवरी के आखिर से यूरिया के दामों में 47 प्रतिशत की भारी तेजी आ चुकी है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ में प्राकृतिक गैस के दाम भी युद्ध शुरू होने के तुरंत बाद 45 प्रतिशत तक बढ़ गए थे।

खाद्य सुरक्षा और सैन्य संकट

कोबैंक के नॉलेज एक्सचेंज का अनुमान है कि खाद बनाने का सामान समय पर न मिलने की वजह से खाद के दाम 2028 तक ऊंचे ही बने रहेंगे। महंगे दाम होने की वजह से किसान मक्का जैसी फसलों से हटकर सोयाबीन जैसी दूसरी फसलों की तरफ जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि इन हालातों के चलते दुनिया भर में अतिरिक्त 45 मिलियन यानी 4.5 करोड़ लोगों को भयंकर भुखमरी और खाने की कमी का सामना करना पड़ सकता है।

इस जंग की वजह से सेना की तैयारियों पर भी बहुत असर पड़ा है। यूरोप में तैनात एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी और एक नाटो अधिकारी ने बताया है कि इलाके में आधुनिक मिसाइल रोकने वाले यंत्रों यानी पैट्रियट मिसाइलों की भारी कमी हो गई है जो कि अब बहुत चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), IFPRI और ACLED जैसी बड़ी संस्थाओं के विश्लेषक इस लड़ाई के कारण हो रहे मानवीय और आर्थिक नुकसान पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि आने वाले समय के खतरों को समझा जा सके।

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