US Labour Department ने Cognizant के PERM फ़ाइलिंग्स पर लगाई रोक, H-1B वीज़ा धोखाधड़ी की चल रही है जांच

अमेरिका के श्रम विभाग ने टेक्नोलॉजी सेक्टर की जानी-मानी कंपनी Cognizant के परमानेंट लेबर सर्टिफ़िकेट यानी PERM फ़ाइलिंग्स पर आधिकारिक तौर पर रोक लगा दी है। यह सख्त कार्रवाई 8 सितंबर और 9 सितंबर 2026 के दौरान सामने आई, जो ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी और पर्म रोजगार कार्यक्रमों में कथित वीज़ा धोखाधड़ी के खिलाफ चलाए जा रहे कड़े अभियान का हिस्सा है। व्हाइट हाउस फ्रॉड टास्क फोर्स से जुड़ी इस व्यापक जांच की शुरुआत पिछले महीने जुलाई में हुई थी, जिसके दायरे में क्लोडेरा कंपनी के भी पर्म आवेदन रोके गए हैं।
अधिकारियों का कड़ा रुख और व्हिसलब्लोअर की शिकायतें
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ लेबर के इंस्पेक्टर जनरल Anthony D'Esposito ने इस निलंबन की घोषणा करते हुए साफ कहा कि अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी हरकत को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने श्रम विभाग के कार्यवाहक सचिव Keith Sonderling के साथ मिलकर इस बात पर जोर दिया कि धोखाधड़ी के खिलाफ यह एक संयुक्त अभियान है और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी। अधिकारियों ने बताया कि यह कदम कथित गड़बड़ियों को लेकर मिले व्हिसलब्लोअर यानी अंदरूनी लोगों की शिकायतों के बाद उठाया गया है, हालांकि अभी तक प्रभावित आवेदनों की कुल संख्या और रोक की अवधि के बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
मौजूदा वीज़ा और पर्म मंजूरियों पर नहीं पड़ेगा असर
श्रम विभाग की इस कार्रवाई से कॉग्निजेंट की पुरानी और पहले से मंजूर हो चुकी पर्म स्वीकृतियों या मौजूदा एच-1बी वीज़ा कार्यक्रमों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। आंकड़े बताते हैं कि कंपनी के एच-1बी वीज़ा पिटीशन की मंजूरी में पिछले कुछ सालों में काफी कमी आई है, जो साल 2020 में 9,413 से घटकर 30 जून 2026 तक मात्र 3,510 रह गई थी। यह रोक तब लगाई गई जब कंपनी ने इसके ठीक एक दिन पहले अमेरिका के 1,500 कॉलेज स्नातकों को नौकरी पर रखने की योजना का ऐलान किया था।
दूसरी आईटी कंपनियों पर भी बढ़ा जांच का दायरा
कॉग्निजेंट के अलावा अब अन्य बड़ी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय आईटी कंपनियां जैसे TCS, Infosys, Wipro और HCL भी अमेरिकी श्रम विभाग की रडार पर आ चुकी हैं। श्रम विभाग लेबर ट्रैफिकिंग और अन्य धोखाधड़ी वाले तौर-तरीकों की व्यापक जांच कर रहा है, जिसके कारण इन कंपनियों के कामकाज पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। खाड़ी देशों और भारत से अमेरिका जाने वाले पेशेवर लोगों और आईटी कर्मचारियों के लिए यह खबर काफी अहम है, क्योंकि वहां कड़े होते नियमों का सीधा असर भविष्य में विदेश जाने वाले युवाओं और नौकरीपेशा लोगों पर पड़ सकता है।