अमेरिका ने ईरान पर किए मिसाइल हमले, ईरान ने भी ड्रोन्स और मिसाइल दागकर दिया करारा जवाब

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के मन में भी डर का माहौल बन गया है। 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना ने ईरान की सीमा के अंदर कई जगहों पर अचानक मिसाइल से हमले किए। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने यह जानकारी दी कि यह बहुत ही सीमित और सटीक कार्रवाई थी जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के खिलाफ की गई। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की उस नापाक हरकत का जवाब थी जिसके तहत उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री सुरंगे बिछाने की कोशिश की थी और जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइलें दागी थीं, हालांकि उन सभी मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया गया था।
ईरान के किन इलाकों में हुआ हमला और क्या हुआ नुकसान
ईरान की तरफ से मिलने वाली खबरों के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई से कई शहरों में भारी नुकसान और अफरातफरी का माहौल देखा गया। ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि खुजेस्तान प्रांत के अहवाज शहर के पास एक अमेरिकी मिसाइल गिरी। वहीं दूसरी तरफ अल जजीरा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सिरिक शहर पर हुए अमेरिकी हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने भी यह पुष्टि की कि सिरिक में फिशमील फैक्ट्री, एक मछली पकड़ने वाले घाट और पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के टावर को निशाना बनाया गया। इसके अलावा कश्म द्वीप पर भी हमले किए गए। आपको बता दें कि इससे पहले 30 अगस्त 2026 को भी अमेरिका ने लरक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चर्स को निशाना बनाया था, जिसके बाद ईरान ने जॉर्डन और यूएई में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी।
ईरान की चेतावनी और खाड़ी देशों में शांति की कोशिशें
इस ताजा हमले के बाद ईरान की सशस्त्र सेना के जनरल स्टाफ और खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इस बयान में अमेरिका को कड़ी और भयानक परिणाम भुगतने की धमकी दी गई और कहा गया कि जो भी देश अमेरिका के हमलों में मदद करेगा, उसे भी निशाना बनाया जाएगा। ईरान के मीडिया संस्थानों जैसे फार्स और तस्नीम ने बताया कि देश ने अपनी तरफ से जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइलें और ड्रोन दागने शुरू कर दिए हैं। इस तनाव के माहौल के बीच शंघाई सहयोग संगठन के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने यह संकेत दिया कि अगर अमेरिका भी सकारात्मक कदम उठाए तो वह अंतरिम समझौते के नियमों का पालन करने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ कतर ने इस पूरे विवाद को शांत करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खुलवाने के लिए कूटनीतिक प्रयास शुरू कर दिए हैं ताकि खाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लाखों प्रवासियों और व्यापारियों को राहत मिल सके।