Sama Safi Case: अमेरिका के 40 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लिखा पत्र, फिलिस्तीनी छात्रा की रिहाई की मांग.

Praggya Singh sabal27 August 20263 min read57 viewsWorld
Sama Safi Case: अमेरिका के 40 सांसदों ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को लिखा पत्र, फिलिस्तीनी छात्रा की रिहाई की मांग.

अमेरिका के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक फिलिस्तीनी-अमेरिकी छात्रा की हिरासत का मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका के 40 सांसदों के एक दल ने मिलकर देश के विदेश मंत्री Marco Rubio को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने इजराइल की हिरासत में बंद Sama Safi नाम की 20 वर्षीय छात्रा को तुरंत रिहा करने की सख्त मांग उठाई है। इस पूरी मुहिम की अगुवाई प्रतिनिधि Rashida Tlaib कर रही हैं, जो मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता हैं। इस पत्र पर कुल छह डेमोक्रेटिक सीनेटरों के अलावा 85 अधिकारों और वकालत करने वाले समूहों ने भी हस्ताक्षर किए हैं, जिससे इस मामले की गंभीरता और अधिक बढ़ गई है।

कौन है Sama Safi और क्या है पूरा मामला

सफा साफ़ी बिरzeit यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान की पढ़ाई करने वाली छात्रा हैं और उनके परिवार के तार अमेरिका के फ्लोरिडा से जुड़े हुए हैं। बीती 2 जून को इजराइली सेना ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में उनके परिवार के घर पर देर रात एक सैन्य छापा मारा था, जिसके दौरान उन्हें हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्हें कुछ समय के लिए छोड़ दिया गया था, लेकिन 16 अगस्त को उन्हें फिर से पकड़कर जेल में डाल दिया गया। इस समय उन्हें हाइफा के पास स्थित डामन सैन्य जेल में बिना किसी औपचारिक आरोप के रखा गया है। अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा है कि यह गिरफ्तारी पूरी तरह से मनमानी है और यह अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के प्रति देश के कर्तव्यों के खिलाफ है। उनका यह भी कहना है कि मौजूदा हालात में इस छात्रा की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

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स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं और यातना के आरोप

इस पूरे मामले में मेडिकल यानी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई हैं। डॉक्टरों ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि साफ़ी को इसी तरह हिरासत में रखा गया, तो उनकी पुरानी बीमारी के कारण उनके शरीर के अंदरूनी अंगों को गंभीर और कभी न ठीक होने वाला नुकसान पहुंच सकता है। सांसदों के पत्र के अनुसार, जब से 16 अगस्त को उन्हें दोबारा पकड़ा गया है, तब से उन्हें न तो उनकी रोजाना की दवाइयां दी गई हैं और न ही किसी डॉक्टर को दिखाया गया है। इसके अलावा पत्र में उनके साथ बदसलूकी करने के कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। इसमें तनावपूर्ण स्थितियों में बैठाना, हथकड़ी लगाना और हवा न आने वाले कमरों में गैस व सन ग्रेनेड फेंकने जैसी बातें शामिल हैं, जिससे उनकी हड्डियों और सीने का दर्द और ज्यादा बढ़ गया है। छात्रा ने खुद भी यह बात बताई है कि पहली बार पकड़े जाने पर उन्हें पहले 24 घंटे तक लगातार हथकड़ी लगाकर, आंखों पर पट्टी बांधकर खाना-पानी नहीं दिया गया था।

अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन की बात

सांसदों ने यह भी तर्क दिया है कि साफ़ी को कब्जे वाले वेस्ट बैंक से उठाकर इजराइल की डामन सैन्य जेल में ले जाना सीधे तौर पर चौथे जिनेवा कन्वेंशन का खुला उल्लंघन है। यह कानून साफ तौर पर कहता है कि किसी भी कब्जे वाले इलाके से कैदियों को जबरन कब्जा करने वाली ताकत के इलाके में नहीं ले जाया जा सकता है। इन सबघटनाओं के बीच साफ़ी के एक रिश्तेदार Nizar Farzakh ने मीडिया को बताया कि उन्हें इस बात का बड़ा डर सता रहा है कि अमेरिकी सरकार द्वारा रिहाई की कोई ठोस कार्रवाई करने से पहले ही कहीं साफ़ी पर दबाव डालकर कोई गलत समझौता न करवा लिया जाए। फिलहाल इस मामले में अमेरिकी सरकार और विदेश विभाग पर जल्द से जल्द कड़े कदम उठाने का भारी दबाव बना हुआ है।

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