US चुनाव के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों का खतरा, भारत पर बढ़ सकता है दबाव: रिपोर्ट

एमके ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक यूएस मिडटर्म चुनाव के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव रहेगा।

Gautam Sahu1 November 20262 min read0 viewsWorld
US चुनाव के बाद भी कच्चे तेल की कीमतों का खतरा, भारत पर बढ़ सकता है दबाव: रिपोर्ट

नई दिल्ली: अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद भी भारत के वित्तीय बाजारों पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता का दबाव बना रह सकता है। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, अगर डेमोक्रेट्स जीतते भी हैं, तो भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विदेश नीति संबंधी फैसलों पर कोई बड़ा अंकुश नहीं लगेगा।

ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि 3 नवंबर के चुनावों के बाद ईरान संघर्ष में फिर से तेजी आने से तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका सीधा असर भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BOP), विदेशी मुद्रा बाजार और इक्विटी पर पड़ने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडटर्म चुनावों के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद कम है और ईरान पर किसी नए अमेरिकी हमले से कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए इन चुनावों के प्रभाव बाजार से ज्यादा भू-राजनीतिक होंगे। घरेलू बाजारों के लिए डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता और कच्चे तेल की कीमतें मुख्य कारक बने रहेंगे।

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राजनीतिक समीकरणों पर बात करते हुए एमके ग्लोबल ने अनुमान लगाया है कि डेमोक्रेट्स हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं और सीनेट में भी उनकी स्थिति मजबूत हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में जीत की 60 प्रतिशत संभावना है, जबकि हाउस में डेमोक्रेट्स और सीनेट में रिपब्लिकन के रहने की 30 प्रतिशत और रिपब्लिकन के दोनों सदनों पर कब्जा बनाए रखने की 10 प्रतिशत संभावना है। अगर कांग्रेस पर डेमोक्रेट्स का नियंत्रण होता है, तो ट्रंप की टैरिफ और आप्रवासन नीतियों की जांच बढ़ सकती है, लेकिन व्यापार और विदेश नीति पर राष्ट्रपति के कार्यकारी अधिकार होने के कारण टैरिफ काफी हद तक अप्रभावित रहेंगे।

ब्रोकरेज ने यह भी कहा कि राजनीतिक गतिरोध का मतलब अमेरिकी शेयरों में निरंतर तेजी नहीं होगा। हालांकि ऐतिहासिक रूप से मिडटर्म चुनावों के बाद 60 ट्रेडिंग दिनों में S&P 500 में करीब 6 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है, लेकिन मौजूदा हालात अलग हैं क्योंकि पिछले छह महीनों में इक्विटी पहले ही 12 प्रतिशत बढ़ चुकी है और ब्रेंट क्रूड में करीब 61 प्रतिशत की तेजी आई है।

भारत के संदर्भ में रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉलर, अमेरिकी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से घरेलू संपत्तियों को सहारा मिलेगा। हालांकि, ब्रोकरेज ने आगाह किया है कि शांति का लाभ (peace dividend) जल्द मिलने की उम्मीद नहीं है, इसलिए भारतीय बाजारों में चुनाव के बाद की कोई भी तेजी अल्पकालिक हो सकती है।

रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया है कि रक्षा, तकनीक और चीन से संबंधित संबंधों में अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक सहयोग मजबूत बना रहेगा, क्योंकि इस व्यापक रिश्ते को दोनों राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त है।

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