ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से खाड़ी देशों के तेल संयंत्र हो सकते हैं तबाह और बढ़ सकती हैं ऊर्जा कीमतें
पूर्व राजदूत केपी फैबियन ने चेतावनी दी है कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से खाड़ी देशों के तेल संयंत्र तबाह हो सकते हैं और कीमतें बढ़ सकती हैं।

नई दिल्ली: कतर में भारत के पूर्व राजदूत केपी फैबियन ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई की, तो इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ेंगी और खाड़ी देशों के तेल संयंत्र तबाह हो सकते हैं।
एएनआई से बात करते हुए फैबियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों का जिक्र किया, जिनमें ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की संभावना जताई गई है। उन्होंने आगाह किया कि तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा होगा और मौजूदा ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।
फैबियन के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलू हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप का एक हिस्सा मामले का राजनयिक समाधान चाहता है, जबकि दूसरा हिस्सा मानता है कि सैन्य हस्तक्षेप अभी भी एक विकल्प है। वहीं, तीसरा हिस्सा सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर राजनयिक बातचीत में बेहतर डील हासिल करना चाहता है।
पूर्व राजदूत ने कहा कि सैन्य अभियान फिर से शुरू करने से वांछित परिणाम नहीं मिलेंगे और इससे कई जटिलताएं पैदा होंगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि जीसीसी देशों की तेल सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण तेल की कीमतें पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। ब्रेंट क्रूड 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था और रिपोर्ट के समय यह 116.91 डॉलर प्रति बैरल पर था, जबकि डब्ल्यूटीआई करीब 103.44 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था।
तेल की कीमतों में यह उछाल ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों और प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में संभावित बाधाओं की आशंका के बीच आया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को लेकर अनिश्चितता ने कीमतों में बढ़ोतरी के डर को और बढ़ा दिया है।
फैबियन ने आयातित कच्चे तेल की लागत के बारे में समझाते हुए कहा कि वास्तविक कीमत 'फ्री ऑन बोर्ड' (FOB) के बजाय 'कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्रेट' (CIF) के आधार पर तय होती है। उन्होंने बताया कि अगर FOB आधार पर कच्चे तेल की कीमत 117 डॉलर प्रति बैरल है, तो परिवहन और बीमा शुल्क जुड़ने के बाद CIF आधार पर इसकी लागत आसानी से 157 डॉलर प्रति बैरल हो सकती है।