ईरान पर एक हफ्ते तक सैन्य अभियान चला सकती है अमेरिकी सेना, राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश का इंतजार
अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले के लिए तैयार है। राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश के 96 घंटों के भीतर कार्रवाई हो सकती है।

तेहरान: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया जा सकता है। यह अभियान करीब एक हफ्ते तक चल सकता है, जिसमें ईरान के ऊर्जा केंद्रों, सैन्य ठिकानों और परमाणु बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी बता रहे हैं कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के 96 घंटे के भीतर अमेरिकी सेना बड़े सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार है। वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया है कि अमेरिका ने खाड़ी देशों को सलाह दी है कि वे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद एक संक्षिप्त लेकिन गहन सैन्य अभियान के लिए तैयार रहें।
कूटनीतिक स्तर पर कतर के मध्यस्थों ने ईरान के सामने एक नया ड्राफ्ट समझौता रखा है, जिसमें विश्वास बहाली के उपायों के लिए सात दिन की समयसीमा तय की गई है। हालांकि, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें कोई औपचारिक शांति प्रस्ताव नहीं मिला है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि अगर फारस की खाड़ी में इजरायल के उकसावे पर कोई सैन्य कार्रवाई होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर इसका विनाशकारी असर पड़ेगा। इससे पहले 26 अक्टूबर को तेहरान में ईरान, तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई थी, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु निरीक्षकों की पहुंच को लेकर मांगें उठाई गईं।
आईएईए के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने 28 अक्टूबर को कहा कि फिलहाल ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है कि ईरान 2025 और 2026 के हमलों में क्षतिग्रस्त हुए अपने परमाणु केंद्रों की मरम्मत या पुनर्निर्माण कर रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि कोई भी संघर्ष बहुत कम समय के लिए होगा, लेकिन इसका अंत इस आश्वासन के साथ होना चाहिए कि तेहरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएगा। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में पिछले 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' और 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सफलता का जिक्र किया।
सुरक्षा हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 27 अक्टूबर को ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास की निगरानी के लिए ड्रोन तैनात किए थे।