ईरान के साथ तनाव बढ़ा, अमेरिका ने इजरायल में तैनात किए सैन्य विमान

ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने इजरायल में सैन्य विमान और मिसाइलें तैनात की हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने सैन्य विकल्पों की समीक्षा की है।

Gautam Sahu30 October 20262 min read0 viewsWorld
ईरान के साथ तनाव बढ़ा, अमेरिका ने इजरायल में तैनात किए सैन्य विमान

इजरायल: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। 30 अक्टूबर 2026 को नेगेव क्षेत्र के ओवदा और नेवातिम एयरबेस पर अमेरिका के 10 सैन्य कार्गो विमान पहुंचे। ये विमान टेक्सास के फोर्ट ब्लिस से रवाना हुए थे और इनमें पैट्रियट बैटरी सहित एयर डिफेंस उपकरण और इंटरसेप्टर मिसाइलें शामिल हैं।

अमेरिका ने केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि जॉर्डन, सऊदी अरब और कतर के ठिकानों पर भी अपनी सैन्य संपत्तियां तैनात की हैं। इसके साथ ही बहरीन सहित मिडिल ईस्ट के अन्य बेसों पर अमेरिकी मरीन ने काउंटर-अनक्रूड एरियल सिस्टम (Counter-Uncrewed Aerial System) उपाय लागू किए हैं। इस सुरक्षा घेरे में अमेरिकी नौसेना, सेना, नेशनल गार्ड के साथ बहरीन डिफेंस फोर्स और ब्रिटिश सेना भी शामिल है।

इसी दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर से मुलाकात की। इस बैठक में ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों की समीक्षा की गई। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन के शीर्ष सैन्य योजनाकार लेफ्टिनेंट जनरल ब्रेट सिल्विया को बर्खास्त कर दिया है। उन पर ईरान से संबंधित संभावित ऑपरेशनों की गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोप है।

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समुद्री मोर्चे पर भी तनाव दिखा है। IRGC ने दावा किया कि 30 अक्टूबर को होर्मुज जलडमरूमध्य में चार तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आए। ईरान का आरोप है कि ये जहाज अमेरिका द्वारा प्रचारित शिपिंग लेन का इस्तेमाल कर रहे थे।

इजरायली अधिकारियों ने अमेरिका के साथ करीबी समन्वय की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों के लिए तैयार हैं, हालांकि सैन्य कार्रवाई का कोई अंतिम आदेश अभी जारी नहीं हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने सभी विकल्प खुले रखे हैं और सैन्य कार्रवाई का संबंध 3 नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों से हो सकता है। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जोर दिया कि प्रशासन 'फॉरएवर वॉर' (हमेशा चलने वाले युद्ध) में फंसे बिना अपने लक्ष्यों को हासिल करना चाहता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका की बयानबाजी को खारिज कर दिया है। उन्होंने आगे के आक्रमण के खिलाफ विश्वसनीय गारंटी की मांग की और कहा कि ईरान अभूतपूर्व जवाब देने के लिए तैयार है। तेहरान ने अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, प्रतिबंधों में ढील और अपनी जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच जैसी अपनी मुख्य मांगों पर अडिग रहने की बात कही है।

अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर क्षेत्रीय सहयोगियों को चेतावनी दी है कि वे नए सैन्य ऑपरेशनों के लिए तैयार रहें। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि 3 नवंबर के चुनावों के बाद ईरान ऊर्जा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर जवाबी हमले कर सकता है।

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