अमेरिका ने ईरान पर किया नया हमला, UAE और जॉर्डन की तरफ आए मिसाइल और ड्रोन.

अमेरिका की सेना ने 1 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे ईरान के अंदर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों पर नए हमले शुरू कर दिए। यूएस सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने बताया कि यह कार्रवाई हाल ही में हुई घटनाओं का जवाब है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों पर हमले की कोशिश और अमेरिकी सैनिकों को मिल रही धमकियां शामिल थीं। इस तनाव के कारण खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और भारत आने-जाने वाले यात्रियों के बीच चिंता का माहौल बन गया है।
तनाव की शुरुआत और क्षेत्रीय असर
यह पूरा विवाद 30 अगस्त 2026 को शुरू हुआ था जब CENTCOM ने लराक द्वीप पर ईरानी रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया था ताकि समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाया जा सके। ईरानी मीडिया के मुताबिक लराक द्वीप पर हुए इन हमलों में दो लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE की तरफ एक ड्रोन भेजा, हालांकि दोनों देशों के रक्षा तंत्र ने इन हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इसके बाद 31 अगस्त 2026 की रात को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास दो तेल टैंकरों पर भी हमले हुए, जिनमें से एक सऊदी अरब का और दूसरा दक्षिण कोरिया का था।
अमेरिकी राष्ट्रपति और अधिकारियों के बयान
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 31 अगस्त को इस स्थिति पर अपना पक्ष रखते हुए कड़े कदम उठाने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि इन हमलों का मतलब पूर्ण युद्ध की शुरुआत नहीं है। अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने जानकारी दी कि सरकार ईरान पर आर्थिक दबाव बना रही है ताकि उन्हें बातचीत की मेज पर लाया जा सके। उनकी शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना, अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को सौंपना और प्रॉक्सी समूहों का समर्थन बंद करना शामिल है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले दो सालों में होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल ऊर्जा मार्ग के रूप में कम हो सकता है क्योंकि वैकल्पिक पाइपलाइनें तैयार हो रही हैं।
सैन्य चेतावनी और ईरान का रुख
CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन Tim Hawkins ने कहा कि अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में और अधिक बारूदी सुरंगें बिछाने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। दूसरी तरफ ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने 31 अगस्त को एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर किसी भी जगह का इस्तेमाल ईरानी धरती पर हमले के लिए किया गया, तो उसका बहुत भारी जवाब दिया जाएगा। इन सबके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 1 सितंबर 2026 को बयान दिया कि तेहरान बातचीत के जरिए समाधान निकालने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका जून के अंतरिम समझौते में किए गए वादों का सम्मान करता है, तो ईरान भी वैसा ही रुख अपनाएगा और आगे का संघर्ष किसी के भी हित में नहीं है।