ईरान पर हमले के लिए अमेरिकी सेना ने तैयार किए कई विकल्प और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सभी रास्ते खुले हैं
अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमले के विकल्प तैयार किए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं।

वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान पर नए सिरे से हमले के लिए कई विकल्प तैयार कर लिए हैं। द हिल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इन सैन्य विकल्पों का मसौदा तैयार कर रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को सौंप दिया है। अब इन प्रस्तावों पर व्हाइट हाउस की मंजूरी का इंतजार है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि सभी विकल्प मेज पर हैं और इस स्थिति का समाधान बहुत जल्द हो सकता है। उन्होंने नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों के बाद कार्रवाई की संभावना जताई है, हालांकि उन्होंने एक बड़े समझौते की उम्मीद भी जाहिर की है।
तनाव उस समय और बढ़ गया जब 25 अक्टूबर 2026 को ईरानी सैन्य अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने बंदर अब्बास शहर के ऊपर एक अमेरिकी LUCAS वन-वे अटैक ड्रोन को मार गिराया है। इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी विदेश विभाग ने जॉर्डन, लेबनान, कतर और यूएई स्थित दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम कर दी है। सऊदी अरब से पहले ही परिवारों और गैर-जरूरी कर्मचारियों को वापस बुला लिया गया था।
नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर जे क्लेटन ने 23 अक्टूबर को चेतावनी दी थी कि ईरान ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना बनाने की कोशिशें काफी बढ़ा दी हैं और कई साजिशें अंतिम चरण में हैं। इस बीच क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी मजबूत है। दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप वहां तैनात हैं और यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट भी वहां पहुंच रहा है।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से चर्चा की है, जो तेहरान में शासन परिवर्तन के मुद्दे पर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। तुर्की में अमेरिकी राजदूत टॉम बैराक ने सुझाव दिया था कि सैन्य कार्रवाई 24-25 अक्टूबर के सप्ताहांत तक हो सकती है।
दूसरी तरफ ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि संघर्ष के बावजूद ईरान की नीतियां नहीं बदलेंगी और किसी भी सैन्य आक्रामकता को तर्कहीन माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अपनी पुरानी स्थिति में नहीं लौटेगा। राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने साफ किया है कि जब तक प्रतिबंध और धमकियां खत्म नहीं होतीं, बातचीत शुरू नहीं हो सकती।
आईआरजीसी प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल हुसैन मोहेब्बी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका या इजरायल के किसी भी हमले का जवाब खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों पर बड़े हमले से दिया जाएगा। वहीं ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ ने अमेरिकी दबाव को बेअसर बताया है।
कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ इस संकट पर चर्चा की और मदद की पेशकश की है। विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी तेहरान का दौरा किया है। लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी को हिजबुल्लाह ने भरोसा दिलाया है कि बड़े युद्ध की स्थिति में वह ईरान की ओर से हस्तक्षेप नहीं करेगा।