अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला, लार्क द्वीप पर की गई सैन्य स्ट्राइक से मची खलबली.

अमेरिका की सेना ने 30 अगस्त 2026 को ईरान के लार्क द्वीप पर स्थित दो लांचर पर सैन्य स्ट्राइक की। यह कार्रवाई एक महीने में अमेरिका द्वारा ईरान पर किया गया पहला सीधा सैन्य हमला है। अमेरिकी सेना को यह कदम तब उठाना पड़ा जब उन्होंने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC को फारसी खाड़ी के महत्वपूर्ण जलमार्ग स्ट्रेच ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगों से लैस रॉकेट तैनात करते हुए देखा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हाल ही में इस इलाके में शिपिंग रूट को पूरी तरह से साफ किया था, जिसके बाद यह तैयारी देखकर अमेरिका ने तुरंत यह सख्त कदम उठाया।
ईरान की प्रतिक्रिया और जवाबी चेतावनी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हमले की पुष्टि की है और देश के सरकारी मीडिया ने इसे एक ड्रोन हमला बताया है। इस स्ट्राइक में कई सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद ईरान के अधिकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोतबा खामेनेई ने रविवार को सभी मुस्लिम देशों से अपील की कि वे अपने असली दुश्मन की पहचान करें और उसका मिलकर सामना करें। इससे पहले 29 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भी देश पर पड़ रहे आर्थिक प्रतिबंधों के असर को स्वीकार किया था और अपनी स्थिति पर अडिग रहने की बात कही थी।
अमेरिका की आर्थिक और सैन्य रणनीति
दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यह साफ कर दिया है कि ईरान किसी तरह की डील करना चाहता है और अमेरिकी सैन्य मिशन तब तक जारी रहेगा जब तक इसकी जरूरत है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने ईरान की बची हुई आर्थिक ताकतों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए 'आर्थिक घुटन' की रणनीति का ऐलान किया है। इस रणनीति के तहत अमेरिकी ट्रेजरी मिस्र के बैंक 'बान्क मिस्र' की यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद शाखाओं को अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से अलग करने की तैयारी कर रही है। यूएई में काम करने वाले प्रवासियों और कारोबारियों के लिए यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय वित्तीय लेन-देन पर भी पड़ सकता है।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की चिंताएं
इस बीच अमेरिकी सैन्य महकमे के भीतर से भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। अमेरिका के शीर्ष सैन्य प्रमुखों और क्षेत्रीय कमांडरों ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ को चेतावनी दी है कि ईरान के खिलाफ लगातार जारी इन ऑपरेशनों की वजह से दुनिया के दूसरे हिस्सों में मौजूद खतरों से निपटने की उनकी क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि इन कमांडरों ने मध्य पूर्व में साल 2027 तक अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने के आदेश का औपचारिक रूप से विरोध यानी नॉन-कंकर किया है, लेकिन उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि वे इन आदेशों का पूरी तरह पालन करेंगे। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह संघर्ष बहुत लंबे समय से खिंचता चला आ रहा है जिससे क्षेत्रीय स्थिरता पर भी असर पड़ रहा है।