अमेरिका ने ईरान के अंदर किया बड़ा सैन्य हमला, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुई स्ट्राइक

मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को अमेरिकी सेना यानी CENTCOM ने यह बड़ी जानकारी दी कि अमेरिकी सैनिकों ने ईरानी जमीन के अंदर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। यह कार्रवाई दोपहर 12 बजे ET यानी 16:00 GMT पर की गई। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस जवाबी कार्रवाई को मंजूरी दी थी। CENTCOM ने साफ किया कि यह हमला हाल ही में होर्मुज जलडममध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर IRGC द्वारा किए गए हमलों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर हमलों के जवाब में किया गया है। इस पूरी घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है और आम जनता तथा प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल देखने को मिल रहा है।
ईरान के कई शहरों में गूंजे धमाके
इस हमले के तुरंत बाद ईरानी सरकारी टेलीविजन और मीडिया चैनलों ने देश के कई दक्षिणी इलाकों में जोरदार धमाके होने की खबर दी। जिन इलाकों में धमाकों की सूचना मिली उनमें मुख्य रूप से बंदर अब्बास (Bandar Abbas), सिरिक (Sirik), चाबहार (Chabahar), कोनारक (Konarak) और केशम द्वीप (Qeshm Island) शामिल हैं। यह सैन्य कार्रवाई पिछले कुछ दिनों से चल रहे तनाव का ही एक बड़ा हिस्सा है। इससे पहले 30 अगस्त 2026 को भी दोनों देशों के बीच भिड़ंत हुई थी, जिसमें अमेरिका ने लारक द्वीप पर हमला किया था और जवाब में ईरान ने भी जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी थीं। इस तरह की घटनाओं से खाड़ी देशों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें तेज हो गई हैं, क्योंकि इसका असर सीधे तौर पर व्यापार और सुरक्षा पर पड़ता है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और संघर्ष विराम की चर्चा
एक तरफ जहां युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत भी जारी है। किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres से मुलाकात की और इस पूरे संघर्ष पर चर्चा की। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि अगर यह युद्ध आगे बढ़ा तो इससे इंसानी जिंदगी और अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान जून महीने में हुए उस समझौते की शर्तों पर तुरंत लौटने के लिए तैयार है जिसके तहत युद्धविराम और 60 दिनों की बातचीत का नियम है, बशर्ते अमेरिका भी ऐसा ही करे। वहीं दूसरी ओर, ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने दो टूक कहा कि जब तक वह समझौता लागू नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडममध्य बंद ही रहेगा।
आर्थिक मोर्चे पर ईरान की तैयारी
अमेरिकी वित्त सचिव Scott Bessent की तरफ से ईरान पर संभावित कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी गई थी। इसके जवाब में ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर Abdolnaser Hemmati ने देश को आश्वस्त किया कि उनके पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है। उन्होंने यह भी घोषणा की कि बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए देश का बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में 2 अरब डॉलर तक की राशि झोंक सकता है ताकि वित्तीय स्थिति को संभाला जा सके। इन तमाम घटनाक्रमों के बीच खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत से वहां आने-जाने वाले लोगों के लिए भी हालात पर नजर रखना जरूरी हो गया है, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध या तनाव का असर सबसे पहले क्षेत्रीय सुरक्षा और यात्राओं पर पड़ता है।