7 अक्टूबर के हमलों के 3 साल बाद भी इज़राइल को अमेरिका की भारी सैन्य मदद जारी

7 अक्टूबर के हमलों को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन इस बीच अमेरिका और इज़राइल के बीच सैन्य रिश्तों में कोई कमी नहीं आई है। अमेरिका ने इस पूरे संघर्ष के दौरान इज़राइल सरकार को न केवल कूटनीतिक समर्थन दिया, बल्कि अरबों डॉलर की सैन्य सहायता भी मुहैया कराई है। बाइडेन और ट्रंप प्रशासन के बीच बदलाव के बावजूद, वाशिंगटन की यह नीति लगातार जारी रही है।
ब्राउन यूनिवर्सिटी के वॉटसन इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से 30 सितंबर 2024 के बीच अमेरिका ने इज़राइल को सीधे तौर पर कम से कम 21.7 बिलियन डॉलर की सैन्य सहायता दी। इसमें मिसाइल डिफेंस सिस्टम, भारी हथियार और विदेशी सैन्य वित्तपोषण (FMF) शामिल थे। अगर यमन और आसपास के क्षेत्रों में सैन्य अभियानों को भी जोड़ लिया जाए, तो अमेरिका का कुल खर्च 31.35 बिलियन से 33.77 बिलियन डॉलर के बीच होने का अनुमान है।
हथियारों की सप्लाई और राजनीतिक टकराव
बाइडेन प्रशासन के दौरान 100 से अधिक हथियारों के ट्रांसफर को मंजूरी दी गई, जिसमें 3 बिलियन डॉलर के F-35 फाइटर जेट और मई 2024 में 1 बिलियन डॉलर का एक बड़ा हथियार पैकेज शामिल था। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में लौटने के बाद पुराने प्रतिबंधों को हटाकर मार्च 2025 में 4 बिलियन डॉलर की सहायता को तेजी से आगे बढ़ाया और लगभग 12 बिलियन डॉलर की बड़ी सैन्य बिक्री को मंजूरी दी।
सितंबर 2026 में ट्रंप प्रशासन ने 2.8 बिलियन डॉलर के पैकेज का प्रस्ताव रखा, जिसमें 40,000 भारी बम शामिल थे। हालांकि, जुलाई 2026 में एक दस साल की योजना भी पेश की गई, जिसमें प्रत्यक्ष सैन्य सहायता को धीरे-धीरे कम करने की बात कही गई, लेकिन मिसाइल डिफेंस सहयोग को बरकरार रखने का वादा किया गया।
इस सहायता को लेकर अमेरिका में राजनीतिक माहौल काफी बंटा हुआ है। जहां रिपब्लिकन स्टडी कमेटी के सदस्य इज़राइल के प्रति अपने अटूट समर्थन को दोहरा रहे हैं, वहीं प्रतिनिधि अयाना प्रेसली ने अमेरिकी करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल रोकने और इस हिंसा को समाप्त करने की मांग की है।
दूसरी ओर, अमेरिका के भीतर आंतरिक तनाव भी बढ़ रहा है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने खुलासा किया कि इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू गाजा के पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग नहीं कर रहे हैं और अपने क्षेत्रीय नियंत्रण को बढ़ाकर स्थिति को और जटिल बना रहे हैं। इसी बीच, पेंटागन ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियानों की तैयारी कर रहा है और इज़राइल ने राजनयिक विवादों के चलते ब्रिटेन के वाणिज्य दूतावास को बंद कर दिया है।