इराक से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी, दो दशक का लंबा सैन्य सफर खत्म

Gautam Sahu30 September 20262 min read0 viewsWorld
इराक से अमेरिकी सेना की पूरी तरह वापसी, दो दशक का लंबा सैन्य सफर खत्म

इराक में दो दशकों से चल रहे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का एक ऐतिहासिक अध्याय समाप्त हो गया है। 30 सितंबर, 2026 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इराक में अपनी सैन्य उपस्थिति को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह कदम वाशिंगटन और बगदाद के बीच 2024 में हुए समझौते के तहत तय की गई समयसीमा का परिणाम है।

भारी जनहानि और मिशन का अंत

इस लंबी सैन्य भागीदारी के दौरान अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस विदाई के दौरान भावुक और कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए बताया कि इस मिशन में 4,500 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए और लगभग 31,000 सैनिक घायल हुए। ट्रंप ने इस पूरे अभियान को "नरक की एक बहुत महंगी यात्रा" करार दिया, हालांकि उन्होंने इसे ISIS के खिलाफ एक "निर्णायक जीत" भी बताया।

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गौरतलब है कि 2014 में शुरू हुआ 'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' ISIS के खिलाफ लड़ाई का मुख्य हिस्सा था। अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि इस अभियान के माध्यम से आतंकी संगठन को पूरी तरह से तबाह कर दिया गया है।

सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव और संप्रभुता दिवस

पेंटागन के प्रवक्ता सीन पारनेल ने पुष्टि की है कि गठबंधन सेनाओं और उनके उपकरणों ने एरबिल एयर बेस से व्यवस्थित तरीके से प्रस्थान कर लिया है। अब इराक की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी इराक की अपनी सेनाओं के पास होगी।

इराक में 30 सितंबर के दिन को "संप्रभुता दिवस" (Sovereignty Day) के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर देश भर में राष्ट्रीय परेड आयोजित की गईं, जो पूर्ण राष्ट्रीय अधिकार की बहाली का जश्न मनाने के लिए की गईं।

भविष्य की चुनौतियां और सुरक्षा का सवाल

हालांकि इराक के अधिकारी अपनी घरेलू सुरक्षा बलों पर भरोसा जता रहे हैं, लेकिन इस वापसी ने कुछ नई चिंताएं भी पैदा कर दी हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों और कुर्द कमांडरों ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना के जाने से देश में सुरक्षा का शून्य (security vacuum) पैदा हो सकता है।

इसके अलावा, ईरान समर्थित मिलिशिया का मुद्दा अभी भी तनाव का मुख्य कारण बना हुआ है। इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जायदी ने गैर-राज्य सशस्त्र समूहों के निशस्त्रीकरण की समयसीमा को जून 2027 तक बढ़ा दिया है, जिससे आने वाले समय में क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

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