ईरान की नौसैनिक नाकाबंदी को सख्त करने के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 138 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदला

रियाद: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी को सख्ती से लागू करने के लिए 138 वाणिज्यिक जहाजों का रास्ता बदल दिया है। 17 अक्टूबर 2026 को की गई इस कार्रवाई का मकसद ईरान को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से पूरी तरह अलग करना है।
सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि वॉशिंगटन ने ईरान का अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार प्रभावी ढंग से काट दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के जरिए कम से कम 25 अरब डॉलर के कच्चे तेल के निर्यात को रोका गया है। साथ ही, तेहरान के लिए निर्धारित करीब 350 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियां भी फ्रीज कर दी गई हैं।
यह समुद्री अभियान 13 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर 14 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से फिर से लागू किया गया। जुलाई में नाकाबंदी दोबारा शुरू होने के बाद से अब तक चार वाणिज्यिक जहाजों को निष्क्रिय किया गया है और आज की कार्रवाई से पहले 135 जहाजों को वापस मोड़ा जा चुका है।
क्षेत्र में तनाव के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जानकारी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक सुपरटैंकर, जिसमें 20 लाख बैरल से ज्यादा कच्चा तेल था, एक नौसैनिक माइन से टकरा गया। IRGC ने जहाज के रास्ते को अनधिकृत बताते हुए चेतावनी दी है कि यह जलमार्ग बंद है।
दूसरी तरफ, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य सामान्य व्यापार के लिए खुला है और पिछले एक हफ्ते में करीब 400 व्यापारी जहाज यहां से गुजरे हैं। अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार इस मार्ग पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं।
समुद्री अशांति के बीच शुक्रवार से होर्मुज क्षेत्र में पांच टैंकरों को निशाना बनाया गया है। इनमें एक टैंकर पर छोटी नाव से रॉकेट-प्रोपल्स्ड ग्रेनेड दागा गया और एक अन्य जहाज पर यमन के अल मुकल्ला तट के पास फायरिंग की गई। इसके अलावा रियाद के ऊपर ड्रोन को बीच में ही रोक लिया गया।
नाकाबंदी को लागू करने के लिए यूएसएस राफेल पेराल्टा (DDG 115) ओमान की खाड़ी और अरब सागर के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में तैनात है। अमेरिकी नियमों के मुताबिक, बिना अनुमति के ईरानी बंदरगाहों में जाने या वहां से निकलने वाले सभी जहाजों को रोका, मोड़ा या पकड़ा जा सकता है। केवल जांच के बाद खाद्य और चिकित्सा आपूर्ति जैसी मानवीय सहायता को छूट दी गई है।
इससे पहले मई 2026 में ईरान ने पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) का गठन किया था। इसके तहत वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए 'वेसल इंफॉर्मेशन डिक्लेरेशन' फाइल करना जरूरी किया गया है, जिसके जरिए ईरान इस जलमार्ग पर अपना अधिकार जता रहा है।