Bahrain में अमेरिकी नौसेना के बेस पर ईरान का बड़ा हमला, बेस के भविष्य को लेकर बनी नई टास्क फोर्स.

Sushma Kumari11 September 20263 min read26 viewsBahrain
Bahrain में अमेरिकी नौसेना के बेस पर ईरान का बड़ा हमला, बेस के भविष्य को लेकर बनी नई टास्क फोर्स.

गल्फ देशों में चल रहे तनाव के बीच बहरीन से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। ईरान के भीषण मिसाइल हमलों की वजह से बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के मुख्य बेस को भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले के बाद से अमेरिकी सेना और प्रशासन के बीच हलचल तेज हो गई है और बेस के भविष्य को लेकर गंभीर विचार किया जा रहा है। आम लोगों और वहां रहने वाले प्रवासियों के लिए यह जानना जरूरी है कि इस इलाके में सुरक्षा हालात कितने बदल चुके हैं।

अमेरिकी नौसेना के बेस पर हुआ भारी नुकसान

कार्यवाहक अमेरिकी नौसेना सचिव Hung Cao ने एक इंटरव्यू में यह पुष्टि की है कि नवल सपोर्ट एक्टिविटी बहरीन यानी NASB को ईरान के हमलों में बहुत ज्यादा क्षति उठानी पड़ी है। आपको बता दें कि यह बेस अमेरिकी नौसेना फोर्सेज सेंट्रल कमांड और फिफ्थ फ्लीट का मुख्य मुख्यालय है। यह हमला इस साल फरवरी से जून के बीच हुए हमलों के दौरान हुआ। इन हमलों में कमांड हेडक्वार्टर, सैटेलाइट संचार टर्मिनल और एक दर्जन से ज्यादा अन्य महत्वपूर्ण इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। तबाही इतनी ज्यादा है कि USS Abraham Lincoln एयरक्राफ्ट कैरियर अब इस बेस पर डॉक नहीं हो पा रहा है।

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तनाव की शुरुआत और क्षेत्रीय असर

यह पूरा विवाद तब और भड़क गया जब अमेरिका और इजराइल ने मिलकर 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने सोशल मीडिया के जरिए इन हमलों की पुष्टि की और कहा कि ईरानी सेना ने फिफ्थ फ्लीट के मुख्यालय और अमेरिकी कार्रवाई में मदद करने वाले अन्य ठिकानों को निशाना बनाया। उनका यह भी कहना था कि अमेरिकी टैक्स देने वाले नागरिकों को ऐसी लड़ाइयों पर पैसा खर्च नहीं करना चाहिए जिनका संबंध इजराइल से है।

नौसेना अधिकारियों का कड़ा रुख और आगे की स्थिति

चीफ ऑफ नवल ऑपरेशंस एडमिरल Daryl Caudle ने घोषणा की कि अमेरिकी नौसैनिकों को फिलहाल इस क्षतिग्रस्त बेस पर वापस जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और वे अपना निजी सामान भी अभी वापस नहीं ला सकते हैं। हालांकि आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार NASB पर किसी की जान जाने की खबर नहीं है, लेकिन यूएस सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन Tim Hawkins ने बताया कि इस पूरे संघर्ष के दौरान 8,000 से अधिक ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के हमलों में कुछ अन्य जगहों पर अमेरिकी सैनिकों की जान गई है। इस क्षेत्रीय अस्थिरता का असर जॉर्डन में स्थित मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर भी पड़ा है, जहां ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने एक ए-10 थंडरबोल्ट और कई एफ-15 लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाया है।

हालात को देखते हुए एडमिरल Brad Cooper ने कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अमेरिका अपनी सेनाओं की रक्षा करने और जरूरत पड़ने पर ईरान के तेल बेड़े को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इन सबके बीच अमेरिकी नौसेना ने अब एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है जो यह मूल्यांकन करेगी कि इस बेस की मरम्मत करना कितना संभव है और क्या बहरीन में इस मुख्यालय का भविष्य आगे सुरक्षित रह पाएगा या नहीं।

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