ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाएगा और युद्धपोतों की संख्या 24 से ज्यादा होगी
अमेरिका मध्य पूर्व में अपने युद्धपोतों की संख्या 24 से ज्यादा करने की तैयारी में है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच यह बड़ा कदम उठाया गया है।

वॉशिंगटन: ईरान के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी नौसेना की मौजूदगी को काफी मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की 24 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों की संख्या 24 से अधिक होने की उम्मीद है।
यह तैनाती वॉशिंगटन की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियानों पर विचार किया जा रहा है। वर्तमान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के तहत यहां दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप मौजूद हैं, जिनमें यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन के साथ-साथ यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश जैसे जहाज शामिल हैं।
युद्धपोतों की कुल संख्या में यह बढ़ोतरी यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और 13वें मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के आने से होगी। ये सैन्य टुकड़ियां 27 सितंबर को सैन डिएगो से रवाना हुई थीं और नवंबर के अंत तक इस क्षेत्र में पहुंचने की संभावना है।
ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाए गए नाकेबंदी के कारण तनाव और बढ़ गया है। अगस्त में सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया था कि बिना स्पष्ट अनुमति के कोई भी जहाज ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश नहीं कर सकता और न ही वहां से निकल सकता है।
दूसरी ओर, 24 अक्टूबर 2026 को ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ अली अब्दुल्लाही ने ऐलान किया कि ईरान किसी भी कीमत पर अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश नहीं करने देगा।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है, हालांकि उन्होंने पहले यह कहा था कि 3 नवंबर के मध्यावधि चुनावों से पहले कोई हमला नहीं होगा। सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और खबर है कि यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप में गोला-बारूद लोड किया जा रहा है और विमानों को तैयार रखा गया है।
इन हालातों के बीच अमेरिका ने जॉर्डन, कतर, यूएई और लेबनान से अपने राजनयिकों और उनके परिवारों को हटाना शुरू कर दिया है। वहीं, अमेरिकी महावाणिज्य दूत रफिक मंसूर ने बताया कि रॉयल सऊदी नेवल फोर्सेस के साथ सुरक्षा सहयोग के प्रयास जारी हैं।