हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण, ईरान की धमकियों के बीच जहाज आ-जा रहे हैं.

Praggya Singh sabal7 September 20263 min read44 viewsUAE
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण, ईरान की धमकियों के बीच जहाज आ-जा रहे हैं.

फारस की खाड़ी और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला हुआ है और इस पर अमेरिकी नौसेना का पूरा नियंत्रण बना हुआ है। 7 सितंबर 2026 को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने यह बात कही है। ईरान की तरफ से लगातार यह कहा जा रहा था कि वे इस इलाके के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र या एक्सक्लूजन जोन बनाना चाहते हैं ताकि आने-जाने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सके। इस पूरी स्थिति का असर खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां यात्रा करने वाले लोगों पर भी पड़ रहा है, क्योंकि समुद्री रास्ते प्रभावित होने से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ता है।

ईरान की नई नीतियां और चेतावनी

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसेन रेजाई ने सोमवार को घोषणा की थी कि उनका देश अमेरिकी नाकाबंदी लाइन से लेकर खाड़ी तक एक नया दायरा बनाना चाहता है। इस नीति के तहत अगर कोई भी जहाज बिना ईरान की अनुमति के इस इलाके में घुसेगा, तो उसे प्रतिबंधित सूची में डाल दिया जाएगा। इसके अलावा ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने भी कहा कि विदेशी जहाजों को ईरान के सशस्त्र बलों द्वारा तय किए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करना होगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने स्पष्ट किया कि हालांकि जलडमरूमध्य आधिकारिक रूप से बंद नहीं है, लेकिन उनके अधिकारी उन तेल टैंकरों पर सख्ती कर रहे हैं जो उनके विरोधियों से जुड़े हुए हैं। इसके साथ ही ईरानी विदेश मंत्रालय ने दक्षिण कोरिया को भी इस क्षेत्र में सैन्य रूप से शामिल न होने की कड़ी चेतावनी दी है।

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अमेरिकी कार्रवाई और जमीनी हकीकत

इन सभी ईरानी दावों के उलट अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि वे समुद्र के अंदर बारूदी सुरंगों को हटाने का गुप्त अभियान चला रहे हैं। अप्रैल से लेकर अब तक लगभग 80 नौसैनिक बारूदी सुरंगों को हटाया जा चुका है, जिससे आने वाले दिनों में जहाजों की आवाजाही और ज्यादा आसान होने की उम्मीद है। अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने जानकारी दी कि इस जलडमरूमध्य से मौजूदा समय में तेल और गैस का प्रवाह लगभग 9 मिलियन बैरल प्रति दिन बना हुआ है। अमेरिकी सेना ने 6 सितंबर को उस ईरानी दावे को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें एक मानवरहित अमेरिकी पोत को नष्ट करने की बात कही गई थी।

यह सारा तनाव उस समय और ज्यादा बढ़ गया जब 5 सितंबर को अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी तेल टैंकरों M/T Downy, M/T Stark 1 और M/T Kylo पर हमला किया था। यह कार्रवाई अमेरिकी युद्धपोतों पर हुए बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के जवाब में की गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की कि M/T Kylo नाम का टैंकर 6 सितंबर को डूब गया था। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस यानी UKMTO ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की हरकतों की वजह से इस जलडमरूमध्य के लिए खतरे का स्तर 'गंभीर' यानी severe बनाए रखा है। पिछले 10 दिनों में समुद्री यातायात घटकर औसतन केवल 10 कमोडिटी जहाज प्रतिदिन रह गया है, जो मई महीने के बाद से सबसे कम आंकड़ा है।

ओमान और यूएई की प्रतिक्रिया

दूसरी तरफ रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान और ओमान आपस में एक नए शिपिंग कॉरिडोर को लेकर बातचीत कर रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने जोर देकर कहा है कि यूएई के ऊर्जा निर्यात पर कोई आंच नहीं आएगी और समुद्री यातायात को धमकाने वाले ईरान को इसके परिणाम भुगतने चाहिए। जहां अमेरिका और दुनिया के दूसरे देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत जहाजों के आने-जाने की स्वतंत्रता की बात करते हैं, वहीं ईरान का यह तर्क है कि अमेरिकी नाकाबंदी संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून सम्मेलन यानी UNCLOS का उल्लंघन करती है। खाड़ी में रहने वाले भारतीय और अन्य प्रवासी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि अगर यह तनाव और बढ़ा, तो जरूरी चीजों की कीमतें और यात्रा के खर्च प्रभावित हो सकते हैं।

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