अमेरिका का लक्ष्य अब तेल या परमाणु मुद्दा नहीं बल्कि ईरान का पूर्ण विनाश और शासन परिवर्तन है: वाएल अववाद

विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाएल अववाद ने कहा कि अमेरिका अब तेल या परमाणु मुद्दों के बजाय ईरान में शासन परिवर्तन और उसके विनाश पर केंद्रित है।

Gautam Sahu24 October 20263 min read0 viewsWorld
अमेरिका का लक्ष्य अब तेल या परमाणु मुद्दा नहीं बल्कि ईरान का पूर्ण विनाश और शासन परिवर्तन है: वाएल अववाद

नई दिल्ली: विदेश मामलों के विशेषज्ञ वाएल अववाद ने चेतावनी दी है कि ईरान को लेकर वाशिंगटन का अंतिम उद्देश्य केवल परमाणु बातचीत तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का असली मकसद ईरान में शासन परिवर्तन करना और वहां की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करना है ताकि इस क्षेत्र में इजराइल एक प्रभावी ताकत बन सके।

एएनआई से बात करते हुए अववाद ने बताया कि व्हाइट हाउस के बयानों में विरोधाभास दिख रहा है, जहां एक तरफ बातचीत के प्रस्ताव हैं और दूसरी तरफ ईरान को मिटाने की धमकियां। उनके मुताबिक, यह बदलाव मध्य पूर्व को इजराइल के साथ मिलकर नए सिरे से गढ़ने की एक गहरी रणनीति का हिस्सा है।

विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि अमेरिका के इस रुख के पीछे घरेलू राजनीतिक दबाव भी है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में अपनी स्थिति सुधारने के लिए मौजूदा हालात का पुनर्मूल्यांकन किया गया है।

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

ईरान की जवाबी कार्रवाई और गल्फ अंडरसी इंटरनेट केबलों को काटने की धमकियों पर अववाद ने कहा कि तेहरान के लिए यह अब एक अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। उन्होंने बताया कि वैश्विक संकट पैदा करने की धमकी केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि अगर अमेरिका युद्ध की ओर बढ़ता है, तो ईरान खुद का बचाव करने और अमेरिका को नुकसान पहुंचाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वाशिंगटन की कूटनीतिक इच्छाशक्ति पर संदेह जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि अमेरिका इस संकट के राजनयिक समाधान के प्रति गंभीर है। उन्होंने जिक्र किया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के बाद तेहरान ने प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन अमेरिका की प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं थी।

कच्चे तेल की कीमतें 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने पर अववाद ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा, घरेलू महंगाई और कीमतों की स्थिरता पर बढ़ते आर्थिक दबाव की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि यह तेल बाजार में प्रभुत्व और गलियारों की लड़ाई है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंडेब जैसे समुद्री रास्तों पर केंद्रित है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा और जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी के दौरे पर उन्होंने कहा कि वाशिंगटन वैश्विक बाजार में वेनेजुएला के तेल की आपूर्ति का रास्ता तलाश रहा है ताकि संभावित आपूर्ति झटकों को कम किया जा सके। अववाद ने जामनगर रिफाइनरी को भारत की एक रणनीतिक संपत्ति बताया, जो दुनिया के लिए डीजल का उत्पादन कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में संतुलन बना सकती है।

इस बीच, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि पिछले एक साल में भारत का अमेरिकी एलपीजी आयात 10 प्रतिशत से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया है, जिससे अमेरिका भारत का मुख्य एलपीजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। उन्होंने रिलायंस द्वारा अमेरिका में एक नई तेल रिफाइनरी बनाने की योजना का भी उल्लेख किया।

दूसरी ओर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पूरा नियंत्रण है और वहां सुरक्षा बनाए रखी गई है। IRGC ने यह भी आरोप लगाया कि दो सुपरटैंकर, जिनमें 45 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल था, अनधिकृत दक्षिणी मार्ग से जाते समय नौसैनिक बारूदी सुरंगों से टकरा गए।

Share:

Comments

Leave a comment