संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले अमेरिका का बड़ा फैसला, फिलिस्तीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध बढ़ाने का ऐलान

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की शुरुआत से कुछ ही दिन पहले अमेरिका और फिलिस्तीन के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका ने फिलिस्तीनी अधिकारियों के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए वीजा प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखने का बड़ा फैसला किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को यह स्पष्ट किया कि फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन यानी पीएलओ के सदस्यों और फिलिस्तीनी अथॉरिटी यानी पीए के अधिकारियों के लिए वीजा से जुड़े नियम सख्त बने रहेंगे।
अमेरिका ने क्यों उठाया यह सख्त कदम
तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस को इस बात की पूरी जानकारी दी है। विभाग का कहना है कि पीएलओ और पीए अमेरिकी कानूनों के तहत किए गए अपने पुराने वादों और जिम्मेदारियों को पूरा करने में एक बार फिर से पूरी तरह विफल रहे हैं। अमेरिका ने इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी पक्ष की ओर से उठाए गए कई कदमों का मुख्य रूप से हवाला दिया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि फिलिस्तीन की तरफ से लगातार ऐसे काम किए जा रहे हैं जो शांति प्रक्रिया में रुकावट डालते हैं।
विशेष रूप से, अमेरिका ने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट यानी आईसीसी और इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी आईसीजे के माध्यम से इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक ले जाने के प्रयासों का जिक्र किया है। इसके अलावा, फिलिस्तीनी राज्य को एकतरफा तौर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिशों को भी अमेरिका ने सीधी बातचीत की प्रक्रिया को दरकिनार करने का प्रयास बताया है। अमेरिका ने यह भी आरोप लगाया है कि पीएलओ और पीए आतंकवादियों को आर्थिक मदद दे रहे हैं और आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा से पहले पुरानी पुनरावृत्ति
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब अगले सप्ताह ही न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का नया सत्र शुरू होने जा रहा है। पिछले साल भी ठीक ऐसा ही देखने को मिला था जब अमेरिका ने महासभा के आयोजन से पहले पीएलओ और पीए के अधिकारियों के वीजा मंजूर करने से साफ इनकार कर दिया था या फिर पहले से जारी कुछ वीजा रद्द कर दिए थे। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के नियमों के तहत न्यूयॉर्क स्थित फिलिस्तीनी मिशन को कुछ खास तरह की छूट जरूर मिलती है। पिछले साल भी फिलिस्तीनी अथॉरिटी के राष्ट्रपति महमूद अब्बास व्यक्तिगत रूप से इस बड़ी सभा में शामिल नहीं हो पाए थे और उन्हें मजबूरी में वीडियो लिंक के जरिए ही सभा को संबोधित करना पड़ा था।
अमेरिकी विदेश विभाग का आधिकारिक बयान
अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्टी प्रवक्ता पालोमा चाकॉन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ट्रंप प्रशासन हर एक वीजा फैसले को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ अहम निर्णय मानता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिका अपनी सभी जिम्मेदारियों को बहुत गंभीरता से निभाता है, लेकिन इसके साथ ही वीजा के लिए आवेदन करने वाले लोगों की जांच और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। चाकॉन ने यह भी बताया कि महासभा में हिस्सा लेने वाले सभी अलग-अलग प्रतिनिधिमंडलों को वीजा आवेदन से जुड़ी जरूरी आवश्यकताओं की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। यदि कोई भी आवेदक सुरक्षा जांच के मानकों या फिर अन्य तय किए गए दिशा-निर्देशों पर खरा नहीं उतरता है, तो उसका वीजा सीधे तौर पर अस्वीकार किया जा सकता है।
इस अमेरिकी घोषणा के बाद अभी तक फिलिस्तीनी अथॉरिटी या फिर पीएलओ की तरफ से कोई भी तत्काल सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह बात भी अभी तक पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है कि राष्ट्रपति महमूद अब्बास और आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने वाले फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल के किस-किस सदस्य के वीजा आवेदन पर आखिरकार क्या फैसला लिया गया है। अमेरिका विदेश विभाग का यह नया फैसला ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान फिलिस्तीन के संवेदनशील मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी कूटनीतिक हलचल और गतिविधियां तेज होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।