US President Donald Trump ने ठुकराया Iran का 7 दिन का रोडमैप, Hormuz Strait पर तनाव जारी।

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान द्वारा पेश किए गए सात दिन के रोडमैप प्रस्ताव को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करना और शांति स्थापित करना था, जिसे ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी अधिकारियों तक पहुंचाया था। इस पूरे घटनाक्रम से खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों के बीच चिंता का माहौल बढ़ गया है, क्योंकि इस संघर्ष का असर क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है।
क्या था ईरान का सात दिन का रोडमैप प्रस्ताव
ईरान की ओर से पेश किए गए इस प्रस्ताव में एक हफ्ते के भीतर शत्रुता समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रोडमैप 17 जून को दोनों देशों के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन पर आधारित था। इस योजना को स्वीकार करने के लिए ईरान ने कुछ शर्तें रखी थीं, जिसमें ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाना, जमे हुए ईरानी फंड को जारी करना और तेल प्रतिबंधों को हटाना शामिल था। इसके अलावा, ईरान ने लेबनान और गाजा में क्षेत्रीय लड़ाई रोकने की भी मांग की थी।
ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने जोर देकर कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता है और वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करने के लिए तैयार है, जिसमें देश में संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निरीक्षकों को अनुमति देना भी शामिल है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी खतरे के खिलाफ अपनी रक्षा करेगा। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि ईरान अब वाशिंगटन पर भरोसा नहीं करता है, लेकिन वह अपनी सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके बावजूद, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने साफ किया कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर कोई भी रियायत नहीं देगा। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि इस योजना को स्वीकार करने का फैसला अब अमेरिका को करना है और उन्होंने दोहराया कि जब तक शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक Strait of Hormuz बंद रहेगा।
Donald Trump की तीखी प्रतिक्रिया और अमेरिकी रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान की मंशा पर संदेह जताते हुए संकेत दिया है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद अमेरिकी बमबारी अभियान फिर से शुरू हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी उन्होंने इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी थी। वहीं, एक अज्ञात अमेरिकी अधिकारी ने चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत को सकारात्मक और रचनात्मक बताया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि अमेरिका इस समय बहुत मजबूत स्थिति में है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण है, इसलिए वे किसी समझौते को अंतिम रूप देने की जल्दी में नहीं हैं।
संघर्ष का असर और नौवहन की स्थिति
यह संघर्ष इस साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जिसके बाद से लगातार हमलों और बीच-बीच में विराम का दौर चल रहा है। शुक्रवार तक अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी के कारण 122 कमर्शियल जहाजों को डायवर्ट किया जा चुका है, जिसमें से केवल इसी हफ्ते 7 जहाजों को मोड़ा गया है। बढ़ते तनाव के बावजूद, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने उड़ान प्रतिबंधों को लेकर तत्काल किसी भी सैन्य प्रतिक्रिया के इरादे से इनकार किया है और बातचीत जारी रहने के दौरान गैर-सैन्य विकल्पों को प्राथमिकता दी है। इस स्थिति पर नजर रखने वाले भारतीय प्रवासियों और अन्य नागरिकों के लिए भी यह तनाव चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि मध्य पूर्व में अस्थिरता का असर सीधे तौर पर आम जनजीवन और उड़ानों पर पड़ता है।