अमेरिका ने ठुकराया ईरान का सीजफायर प्रस्ताव, ट्रंप बोले- आर्थिक तंगी से जूझ रहा है तेहरान

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 27 सितंबर 2026 को ईरान के उस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से ठुकरा दिया है जिसमें अस्थायी संघर्षविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की मांग की गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा है और वह इस संघर्ष में बुरी तरह से हार रहा है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस हफ्ते अप्रत्यक्ष बातचीत जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन ईरान ने अपनी स्थिति को बहुत आगे बढ़ा दिया है और सैन्य हमलों को फिर से शुरू करना उनके लिए हमेशा एक विकल्प बना हुआ है।
कतर के जरिए भेजा गया था प्रस्ताव
ईरान की ओर से यह प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका को सौंपा गया था। इस प्रस्ताव में मुख्य रूप से अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने, जमे हुए फंड को जारी करने और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत समाप्त करने की मांग शामिल थी। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत Mike Waltz ने जानकारी दी कि इस प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर दिया गया क्योंकि तेहरान ने बातचीत शुरू करने से पहले ही बहुत भारी रियायतें देने की मांग रख दी थी। राजदूत वाल्ट्ज ने यह भी जोड़ा कि जून महीने के समझौता ज्ञापन के कथित उल्लंघनों और अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर लगातार हमलों के बाद अमेरिका को ईरान की नीयत पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। वहीं दूसरी ओर, ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने अमेरिकी प्रशासन के आर्थिक दबाव अभियान का बचाव किया और इसे पूरी तरह सफल बताया।
संयुक्त राष्ट्र में गूंजा ईरान का मुद्दा
न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी धमकियों का कड़ा विरोध किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वाशिंगटन यह साबित कर दे कि वह सत्ता परिवर्तन की कोशिश नहीं कर रहा है, तो तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं पर चर्चा करने के लिए तैयार है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि हालांकि उनका देश किसी भी बड़े युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वे कूटनीति के दरवाजे खुले रखना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के सार्वजनिक बयानों के बावजूद उन्हें अमेरिकी पक्ष से इस प्रस्ताव का कोई आधिकारिक अस्वीकृति पत्र नहीं मिला है। हालांकि, ईरान के भीतर कट्टरपंथी गुटों ने विदेश मंत्री की इस कूटनीतिक पहल पर सवाल उठाए हैं और कुछ लोगों ने उनके महाभियोग की मांग भी कर दी है।
सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव
सुरक्षा के मोर्चे पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं क्योंकि ईरान ने तेहरान के बड़े हिस्से में 51,000 सुरक्षा कर्मियों को हाई अलर्ट पर तैनात कर दिया है और 27 सितंबर की आधी रात तक सभी कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता Hossein Mohebi ने घोषणा की कि जब तक यमन में शत्रुता समाप्त करने सहित सात विशेष शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका संगठन अमेरिका को निशाना बनाता रहेगा। इसके अलावा, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने जासूसी की आशंका जताते हुए रविवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक अमेरिकी पनडुब्बी ड्रोन को जब्त करने का दावा भी किया। ईरान की सेना के प्रवक्ता Mohammad Akraminia ने चेतावनी दी कि किसी भी संभावित टकराव में अमेरिकी सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस बीच, घरेलू स्तर पर भी इस संघर्ष की तीखी आलोचना हो रही है और अमेरिकी सीनेटर Mark Kelly ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस पूरे मामले को संभालने के तरीके को एक आपदा करार दिया है।