US President Trump: अमेरिका कभी भी कर सकता है ईरान के परमाणु ठिकाने पर हमला, तेहरान ने भी दी पूरी तैयारी की चेतावनी.

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने 4 सितंबर 2026 को ओवल ऑफिस से एक बार फिर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका बहुत जल्द ईरान के बेहद सुरक्षित और जमीन के नीचे बने परमाणु ठिकाने यानी Pickaxe Mountain पर हमला कर सकता है। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि इस सैन्य अभियान का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी स्पेस फोर्स और अंतरिक्ष तकनीक की मदद से तेहरान और इस परमाणु साइट की हर गतिविधि पर पूरी नजर रखी जा रही है। राष्ट्रपति ने यह भी माना कि यह एक बड़ा सैन्य संघर्ष है, लेकिन परमाणु विकास को रोककर अमेरिका ने बड़ी सफलता हासिल कर ली है। यह परमाणु ठिकाना नतांज यूरेनियम संवर्धन सुविधा के पास स्थित है, जहां सुरंगों के अंदर हजारों सेंट्रीफ्यूज रखे गए हैं।
ईरान की सेना और सरकार का कड़ा रुख
अमेरिकी धमकियों के जवाब में ईरान के खातम अल-अंबिया ज्वाइंट एयर डिफेंस बेस के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल Alireza Elhami ने 4 सितंबर 2026 को ऐलान किया कि ईरान किसी भी तरह के मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है क्योंकि खतरा अभी टला नहीं है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का रक्षा क्षेत्र पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है। देश के वैज्ञानिकों और विश्वविद्यालयों की मदद से स्थानीय स्तर पर सैन्य उपकरण तैयार किए गए हैं। इसके अलावा ईरानी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Mohammad Akrami Nia ने घोषणा की कि अब देश की नीति में बदलाव किया गया है और वे एहतियाती रक्षा और निवारक अभियानों पर ध्यान दे रहे हैं। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी जॉर्डन के विदेश मंत्री की आलोचना करते हुए अमेरिका पर ईरान और अरब देशों की संप्रभुता का अनादर करने का आरोप लगाया है। इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ANI News पर उपलब्ध है।
क्षेत्रीय तनाव और आर्थिक असर
इस बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सेना लगातार ईरान के रडार सिस्टम को निशाना बना रही है। सितंबर 2026 की शुरुआत में अमेरिकी वित्त विभाग ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स-कुद्स फोर्स से कथित संबंधों के कारण तुर्की स्थित गोल्डन ग्लोबल बैंक पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही अमेरिका ने सऊदी अरब को 5 अरब डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी भी दे दी है, जिसे हाल ही में ईरानी बलों और हूती विद्रोहियों की तरफ से ड्रोन और मिसाइल हमलों का सामना करना पड़ा है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। देश की मुद्रा रियाल में भारी गिरावट आई है, घरेलू स्तर पर गैस की कमी हो गई है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री जहाजों की आवाजाही भी काफी कम हो गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां यात्रा करने वाले नागरिकों के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है।