UAE और Jordan पर ईरान का बड़ा हमला, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दिया कड़ी कार्रवाई का कड़ा आदेश।

मध्य पूर्व में तनाव अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया है जब अमरीकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। अमरीकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फॉक्स न्यूज से बातचीत के दौरान साफ कहा है कि अमरीका इस हमले का बहुत कड़ा जवाब देगा। हालांकि, अमरीकी एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते ज्यादातर ईरानी मिसाइलों को हवा में ही रोक लिया और उन्हें तबाह कर दिया। यह पूरी घटना सोमवार, 31 अगस्त 2026 को हुई, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और काम करने वाले प्रवासियों के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है।
अमरीका की कार्रवाई और लarak द्वीप पर एयरस्ट्राइक
इससे पहले रविवार, 30 अगस्त 2026 को अमरीकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास लarak द्वीप पर मौजूद ईरानी रॉकेट लॉन्चर्स पर अचानक एयरस्ट्राइक की थी। अमरीकी अधिकारियों का कहना था कि यह एक सीमित और सटीक कार्रवाई थी जिसे एक बड़े खतरे को टालने के लिए किया गया था। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्क्स यानी IRGC के लोग इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते में पानी के नीचे बारूदी सुरंग यानी सी माइंस बिछाने की तैयारी कर रहे थे। अमरीका ने ईरान के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस इलाके में किसी बड़े टैंकर को माइंस से नुकसान पहुँचाया गया है।
जॉर्डन और UAE में हमलों की पूरी सच्चाई
लarak द्वीप पर हुई अमरीकी कार्रवाई के जवाब में ईरान के IRGC ने जॉर्डन में बने King Hussein और Al-Azraq एयर बेस पर मिसाइलें दागने का दावा किया और भारी नुकसान की बात कही। हालांकि अमरीकी अधिकारियों ने इन नुकसान की खबरों को गलत बताया। जॉर्डन की सेना ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की कि उन्होंने अपने आसमान में आए आठ मिसाइलों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया और इस घटना में किसी भी प्रकार के जान या माल का कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके अलावा ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में मौजूद अमरीकी कर्मियों को भी निशाना बनाने का दावा किया था। UAE Ministry of Defence ने साफ किया कि अल मिन्हाद एयर बेस पर कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन देश के समुद्री क्षेत्र के ऊपर एक ईरानी ड्रोन को जरूर मार गिराया गया जिसे सरकार ने एक खतरनाक escalation बताया है।
डिप्लोमैटिक बातचीत और आगे का माहौल
दोनों देशों के बीच पिछले एक महीने से चल रही शांति अब पूरी तरह टूट चुकी है और दोनों तरफ से तीखे बयान सामने आ रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमरीकी हमलों को देश की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताया और भविष्य में किसी भी कार्रवाई का कड़ा जवाब देने की बात कही। ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी बयान दिया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन अगर उस पर कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो वह चुपचाप नहीं बैठेगा। वहीं UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार Anwar Gargash ने स्थायी राजनीतिक समाधान की मांग करते हुए कहा कि इस तरह की न तो युद्ध और न ही शांति वाली स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती है। खाड़ी देशों में रहने वाले आम नागरिकों और भारतीय प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं।