US propane exports to India rise as South Asian demand sets record

Lov Singh2 October 20262 min read0 viewsEnglish
US propane exports to India rise as South Asian demand sets record

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अमेरिकी प्रोपेन निर्यात में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। वैश्विक ऊर्जा व्यापार के बदलते समीकरणों और दक्षिण एशिया में बढ़ती मांग के चलते साल 2026 की पहली छमाही में यह उछाल दर्ज किया गया है। रिपोर्ट बताती है कि इस दौरान अमेरिकी प्रोपेन के कुल शिपमेंट ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं, जिसमें भारतीय बाजार की अहम भूमिका रही है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा निर्यात

EIA के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच अमेरिका का प्रोपेन निर्यात औसतन 20 लाख बैरल प्रतिदिन (b/d) दर्ज किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 11 प्रतिशत अधिक है। खास तौर पर अप्रैल के महीने में निर्यात ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और यह 2.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। इस बढ़ोतरी के पीछे भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में बढ़ी हुई खपत मुख्य कारण रही है।

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क्यों बढ़ रही है अमेरिकी प्रोपेन की मांग?

अमेरिका में प्राकृतिक गैस के उत्पादन में पिछले एक दशक से लगातार वृद्धि हो रही है। प्रोपेन मुख्य रूप से प्राकृतिक गैस प्रसंस्करण और कच्चे तेल के शोधन का उप-उत्पाद (byproduct) है। घरेलू स्तर पर प्रचुर उत्पादन के कारण अमेरिका में प्रोपेन की कीमतें एशियाई बाजारों की तुलना में अपेक्षाकृत कम बनी हुई हैं। कम कीमत और बेहतर उपलब्धता के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए अमेरिकी प्रोपेन खरीदना अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में आए बदलावों और मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई में व्यवधान के बाद आयातकों ने विकल्पों की तलाश शुरू कर दी थी। पेट्रोकेमिकल उद्योगों में प्रोपेन का इस्तेमाल प्लास्टिक निर्माण के लिए कच्चे माल (जैसे प्रोपलीन और एथिलीन) के रूप में बड़े पैमाने पर किया जाता है, जिससे इसकी मांग लगातार बनी हुई है।

चीन के साथ व्यापार में गिरावट

एक तरफ जहां भारत जैसे देशों के साथ अमेरिकी प्रोपेन का व्यापार बढ़ा है, वहीं चीन के मोर्चे पर गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिकी प्रोपेन पर चीन द्वारा लगाए गए शुल्कों (tariffs) के कारण वहां के लिए शिपमेंट में भारी कमी आई है। साल 2025 में चीन को होने वाला निर्यात 28 प्रतिशत घटा था, और 2026 की पहली छमाही में भी इसमें 19 प्रतिशत की और गिरावट आई है।

भविष्य की चुनौतियां

भले ही वर्तमान में आंकड़े उत्साहजनक हैं, लेकिन EIA ने चेतावनी दी है कि भविष्य में निर्यात की इस रफ्तार को कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका की सीमित निर्यात क्षमता और पनामा नहर में सूखे की स्थिति के कारण जल स्तर घटने से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। इससे परिवहन लागत बढ़ सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रोपेन की आवाजाही को प्रभावित कर सकती है।

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