अमेरिका ने खारिज किया ईरान का हॉर्मूज जलडमरूमध्य प्रस्ताव, बातचीत में फंसा पेंच

हॉर्मूज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और कहा है कि ईरान के पास इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी शर्तें थोपने का कोई अधिकार नहीं है। यह बड़ा घटनाक्रम 25 सितंबर 2026 को सामने आया जब ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कतर के मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा था। इस प्रस्ताव में मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और क्षेत्र के हालातों को सुधारने के लिए कई बातें कही गईं थीं, लेकिन अमेरिका ने इस पर अपनी कड़ी नाराजगी जताई और किसी भी तरह के दबाव में काम करने से मना कर दिया।
सात दिवसीय योजना और ईरान की मांगें
ईरान की तरफ से पेश किए गए इस प्रस्ताव को seven-day plan का नाम दिया गया था। यह प्लान जून में हुए इस्लामाबाद समझौते पर आधारित था। इस दस्तावेज में लेबनान समेत पूरे मध्य पूर्व में दुश्मनी को पूरी तरह रोकने की बात कही गई थी। इसके साथ ही ईरान ने मांग की थी कि उसके रोके गए कम से कम $12 billion यानी बारह अरब डॉलर के फंड को तुरंत आजाद किया जाए। इसके अलावा ईरानी तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को भी समाप्त किया जाए। इसके बदले में ईरान ने सातवें दिन हॉर्मूज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को देश में वापस आने की अनुमति देने का ऑफर दिया था।
ईरान के राष्ट्रपति का बयान और अमेरिका का रुख
इन खुलासों के बाद ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 26 सितंबर 2026 को सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में साफ किया था कि अगर अमेरिका इस प्रस्ताव को मानता है तो उनकी सरकार अपने वादों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि उनका देश कूटनीति का सम्मान करता है लेकिन वह ताकत के डर के आगे कभी नहीं झुकेगा। वह नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले इस समझौते को अंतिम रूप देना चाहते थे। हालांकि इन तमाम कोशिशों के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 26 सितंबर 2026 को इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अमेरिका के विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे अधिकारी तेहरान के इन वादों पर शक की नजर से देख रहे हैं।
कतर के माध्यम से जारी हैं अप्रत्यक्ष चर्चाएं
भले ही प्रस्ताव खारिज हो गया हो लेकिन सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि कतर के मध्यस्थों के जरिए सकारात्मक और रचनात्मक अप्रत्यक्ष बातचीत अभी भी चल रही है। अमेरिका का यह भी कहना है कि वह किसी भी जल्दीबाजी में नहीं है और नवंबर के चुनावों के बाद ईरान पर फिर से बमबारी अभियानों के शुरू होने की संभावना बनी हुई है। चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping का भी इन कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन मिल रहा है। यह सारी गतिविधियां पिछले सात महीनों से चल रहे संघर्ष और न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के बीच हो रही हैं। खाड़ी देशों में चल रहे इन तनावों का असर सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वहां रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ रहा है जिससे आम लोगों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।