अमेरिका के सांसद ने ईरान पर ट्रंप के 'फेल स्टेट' वाले बयान पर उठाए सवाल, बोले कैसे कर रहा है हमले

अमेरिकी सांसद Ted Lieu ने ईरान को 'फेल स्टेट' यानी नाकाम देश बताने पर ट्रंप प्रशासन की जमकर आलोचना की है। उन्होंने सवाल किया कि अगर ईरान वास्तव में नाकाम देश है, तो वह अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय सहयोगियों पर लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करने की ताकत कैसे बनाए हुए है। यह बयान उन्होंने 4 सितंबर 2026 को दिया, इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी उन्होंने कहा था कि मौजूदा संघर्ष यह दिखाता है कि कई अमेरिकी प्रशासन मिलकर सैन्य परिसंपत्तियों की रक्षा करने में नाकाम रहे हैं।
ट्रंप का दावा और खुफिया रिपोर्ट
राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कई बार 'फेल स्टेट' और 'डेड' देश कहा है। उन्होंने इसके पीछे 300% की महंगाई दर और कम सैन्य क्षमता का हवाला दिया। हालांकि इसके विपरीत, अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों से पता चलता है कि ईरान के पास अभी भी उसका 70% मिसाइल स्टॉक बचा हुआ है। इसके अलावा, देश के पास अपने भूमिगत मिसाइल ठिकानों का 90% हिस्सा सुरक्षित है और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित 33 में से 30 मिसाइल साइटों को फिर से चालू कर लिया गया है। ट्रंप ने 4 सितंबर को इस संघर्ष को 'छोटे आलू' यानी मामूली बात कहकर टालने की कोशिश की, लेकिन इससे पहले वह कड़ी प्रतिक्रिया देने और 'पिक्सैक्स माउंटेन' को निशाना बनाने की बात कह चुके हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने यह साफ किया है कि ईरान किसी भी तरह की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल नहीं बना रहा है।
खाड़ी देशों में सैन्य हलचल
खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार तेज बनी हुई हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने 2 सितंबर 2026 को कुवैत, जॉर्डन, बहरीन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर संयुक्त मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इसके अगले दिन यानी 3 सितंबर को ईरानी अदेश ने 'ऑपरेशन साएकेह' की शुरुआत की। इस ऑपरेशन के तहत कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में अमेरिकी सुविधाओं को निशाना बनाया गया। ईरान का मुख्य लक्ष्य संचार प्रणालियों, रडार सिस्टम और फाइटर जेट के हैंगर को नुकसान पहुंचाना था। कुवैत के अधिकारियों ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया, क्योंकि देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने आने वाले हथियारों को हवा में ही रोक लिया था।
अमेरिका का पक्ष और जांच
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने 4 सितंबर को जानकारी दी कि प्रशासन ईरान में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले में कम से कम चार लोगों की मौत की खबरों की जांच कर रहा है। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध नहीं कर रहा है, बल्कि उसका मुख्य ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने पर है। इन सब घटनाओं के बीच पेंटागन ने सुरक्षा लीक की जांच के लिए 50 ज्वॉइंट स्टाफ सदस्यों के पॉलीग्राफ टेस्ट यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट शुरू कर दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भले ही ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा हो, लेकिन उसकी मिसाइल नीति अभी भी मजबूत है। आने वाले समय में वह बड़े पैमाने पर बनने वाली क्रूज मिसाइलों और जेट से चलने वाले ड्रोनों का इस्तेमाल कर सकता है, जिसे साल 2023 के अंत से रूस के साथ साझा की गई क्रूज मिसाइल तकनीक का समर्थन भी मिल सकता है।