अमेरिका में रूस और ईरान प्रतिबंध बिल पर आज होंगे हस्ताक्षर, भारत पर क्या पड़ेगा असर.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump शुक्रवार को Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 बिल पर हस्ताक्षर करने वाले हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है कि यह कानून रूस और ईरान पर शिकंजा कसने के लिए लाया जा रहा है। इस नए कानून के पास होने से अमेरिका को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा जो रूस से लगातार कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीद रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया और घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी आप ANI News पर देख सकते हैं।
भारत और चीन पर टिकी हैं सबकी नजरें
भारत और चीन दुनिया के उन बड़े देशों में शामिल हैं जो रूस से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदते हैं। इस नए कानून के तहत अमेरिका के पास यह ताकत होगी कि वह रूसी ऊर्जा के बड़े आयातकों पर भारी टैक्स लगा सके। हालांकि, इस बिल में सीधे तौर पर भारत पर कोई 100 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगाया गया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार जरूर मिल गया है कि वह स्थिति के हिसाब से यह कड़ा कदम उठा सकते हैं। अमेरिका ने इस साल अगस्त में भी भारतीय सामानों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, जिसका संबंध सीधे तौर पर नई दिल्ली के रूसी तेल खरीदने के फैसले से था।
भारत के ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का रुख
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस पूरे मामले पर साफ कर दिया है कि देश अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का यह भी कहना है कि वह अलग-अलग स्रोतों से तेल आयात जारी रखेगी और बाजार की स्थिति को देखते हुए अपने फैसले लेगी। भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी समकक्षों के साथ बातचीत में इस बात को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस तरह के कानूनों से व्यापार और आर्थिक रिश्तों पर क्या जोखिम आ सकते हैं। फिलहाल भारतीय पक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और अपनी आर्थिक हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
यूक्रेन और रूस की प्रतिक्रिया
यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने अमेरिकी संसद द्वारा इस बिल के पास होने का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस तरह के कड़े आर्थिक प्रतिबंधों से रूस पर दबाव बनेगा और युद्ध को रोकने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि रूस पर अब तक 30,000 से ज्यादा प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जो दुनिया के बाकी देशों पर लगे कुल प्रतिबंधों से भी दोगुने हैं। इसके बावजूद रूस ने अपने व्यापार का दायरा बदलते हुए अपने भरोसेमंद साझीदारों के साथ रिश्तों को और मजबूत किया है।
कानून के अन्य कड़े प्रावधान
इस नए कानून के दायरे में केवल तेल खरीदने वाले देश ही नहीं, बल्कि रूसी नेतृत्व, वित्तीय संस्थान और समुद्री बेड़े भी शामिल हैं। इस बिल के तहत रूस के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और सेना के बड़े अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, रूस के सेंट्रल बैंक और प्रमुख बैंकों के लेन-देन पर भी रोक लगाई जा रही है। अमेरिका का यह कदम यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस पर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार माना जा रहा है, जिससे वैश्विक व्यापार और कूटनीति में एक नया मोड़ आ गया है।