अमेरिका के रूस प्रतिबंध बिल पर पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान, इसे बताया भारत पर दबाव बनाने की रणनीति.

Nura Basta17 September 20263 min read22 viewsIndia
अमेरिका के रूस प्रतिबंध बिल पर पूर्व राजनयिक का बड़ा बयान, इसे बताया भारत पर दबाव बनाने की रणनीति.

अमेरिकी संसद द्वारा रूस और ईरान पर प्रतिबंध से जुड़ा नया बिल पास किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। भारत के पूर्व राजनयिक Vidya Bhushan Soni ने इस कदम को एक सोची-समझी रणनीति करार दिया है। उनका कहना है कि इस विधायी प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य भारत को रूस से ऊर्जा आयात कम करने के लिए मजबूर करना और अटके हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर अपनी शर्तें मनवाना है।

अमेरिकी संसद का फैसला और राजनीतिक आम सहमति

वाशिंगटन में इस कानून को लेकर राजनीतिक दल एक साथ आ गए हैं, जिससे दोनों सदनों में इसे आसानी से मंजूरी मिल गई। इस बारे में बात करते हुए पूर्व राजनयिक ने हैरानी जताई कि डेमोक्रेटिक पार्टी के वे सांसद जो आम तौर पर भारत के समर्थक माने जाते हैं, उन्होंने भी रिपब्लिकन पार्टी के साथ मिलकर इस बिल का समर्थन किया। अब यह बिल अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के पास हस्ताक्षर के लिए पहुंच गया है, जिस पर अंतिम मुहर लगना बाकी है।

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क्या सौ फीसदी टैरिफ तुरंत लागू होगा

भारत में इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई थी कि क्या अमेरिका तुरंत सौ फीसदी टैक्स लगा देगा। इस आशंका को दूर करते हुए पूर्व राजनयिक ने स्पष्ट किया कि यह बिल अपने आप में कोई स्वचालित व्यापार जुर्माना नहीं है। यह कानून केवल अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह अपनी सुविधा और देश के हित के अनुसार इस पर कार्रवाई कर सकते हैं। राष्ट्रपति चाहें तो इसका उपयोग बहुत सीमित रूप से कर सकते हैं, या फिर इसका इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें।

रूस से तेल आयात और व्यापारिक असहमति

अमेरिका के इस कदम के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। पहला यह कि वाशिंगटन चाहता है कि भारत रूस से कच्चे तेल का आयात धीमा कर दे। लेकिन भारत की ऊर्जा जरूरतें इतनी बड़ी हैं कि देश के आर्थिक हितों को ताक पर रखकर इसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता है। दूसरा कारण भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रहा गतिरोध है। अमेरिका ने समझौते में कुछ ऐसी शर्तें जोड़ दी थीं जो भारतीय वार्ताकारों को मंजूर नहीं थीं, जिसके कारण बातचीत रुक गई थी।

भारतीय निर्यात पर असर और कूटनीतिक रुख

अगर इस अधिनियम को पूरी तरह से लागू कर दिया जाता है और भारी-भरकम टैक्स लगा दिए जाते हैं, तो इससे अमेरिका को होने वाले भारत के मुख्य निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। इसमें विशेष रूप से textiles, chemicals और pharmaceuticals शामिल हैं, जिनकी कीमतें अमेरिका में बहुत ज्यादा हो जाएंगी। इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि भारत के पास कूटनीतिक विकल्प खुले हैं और व्हाइट हाउस दोनों देशों के रणनीतिक रिश्तों को देखते हुए इसे रोक सकता है। भारत सरकार और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री Piyush Goyal के नेतृत्व में देश के आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही आगे के कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, विदेश मंत्रालय ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत की ऊर्जा जरूरतें और खरीद हमेशा देश के 1.4 billion लोगों के हितों को ध्यान में रखकर तय होती हैं।

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