ईरान तेल शिपिंग धोखाधड़ी: अमेरिकी प्रतिबंधों के घेरे में चंडीगढ़ के कारोबारी और कई भारतीय कंपनियां

अमेरिका ने ईरान के शैडो ऑयल फ्लीट की मदद करने और समुद्री धोखाधड़ी के आरोप में चंडीगढ़ स्थित व्यक्तियों और कई भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं।

Gautam Sahu5 November 20262 min read0 viewsWorld
ईरान तेल शिपिंग धोखाधड़ी: अमेरिकी प्रतिबंधों के घेरे में चंडीगढ़ के कारोबारी और कई भारतीय कंपनियां

चंडीगढ़: अमेरिकी सरकार ने ईरान के 'शैडो ऑयल फ्लीट' की मदद करने और समुद्री धोखाधड़ी में शामिल होने के आरोप में भारत की कई कंपनियों और व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिका का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क ईरान की सेना और उसके प्रॉक्सी समूहों को आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए चलाया जा रहा था।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने चंडीगढ़ निवासी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद को इस आपराधिक नेटवर्क के मुख्य किरदारों के रूप में पहचाना है। इनके साथ अश्वनी कुमार धीमान और ईश्विंदर सिंह नामक निदेशकों ने भी काम किया। इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने के लिए प्रतिबंधित जहाजों के संचालन में समन्वय किया।

इस कार्रवाई के तहत भारत की नौ संस्थाओं को प्रतिबंधित सूची में डाला गया है। इनमें ओशनिएक टेक्नोलॉजीज इंडिया, आर्यवर्त शिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सिंगापुर स्थित एस्वातिनी मैरीटाइम अफेयर्स एंड इंटरनेशनल शिप रजिस्ट्री शामिल हैं। इसके अलावा प्रेसेप्ट ट्रेंड्स, पॉलिनेशिया मैरीटाइम, एलेक्सार्या फिनसर्व, एलेक्सार्या मीडिया एंड एंटरटेनमेंट, विहाराबोटिंग और आर्यवर्त मैरीटाइम एंड एजुकेशनल ट्रस्ट पर भी पाबंदी लगाई गई है।

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जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क गयाना, एस्वातिनी, लाओस, अरूबा, निकारागुआ और सिंट मार्टिन जैसे देशों के समुद्री अधिकारियों के नाम का गलत इस्तेमाल कर रहा था। फर्जी रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेट जारी कर जहाजों को गलत झंडों (फॉल्स फ्लैग्स) के तहत चलाया गया, ताकि तेल ले जा रहे जहाज वैश्विक प्रतिबंधों से बच सकें। बताया गया है कि ये अवैध गतिविधियां कम से कम 2014 से चल रही थीं।

अमेरिका ने इसी मामले में तुर्की की कंपनी फुगो ग्राउंड सर्विसेज इंक पर भी प्रतिबंध लगाए हैं, जिसने ईरान के विमानन क्षेत्र की मदद की। ये सभी कार्रवाई कार्यकारी आदेश 13902 के तहत की गई है, जो तेहरान से जुड़े पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल और एविएशन उद्योगों को लक्षित करता है।

यह पूरी कार्रवाई 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 24 अगस्त 2026 को हुई थी। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि इस योजना में शामिल लोग या तो अमेरिका के साथ हैं या उसके खिलाफ। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान शासन को जमीन, जल या नभ से समर्थन देने वाले किसी भी पक्ष पर प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने उद्योग जगत को चेतावनी जारी कर ऐसे जहाजों के साथ काम न करने की सलाह दी है जिनके झंडे फर्जी हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की धोखाधड़ी समुद्री कानून का उल्लंघन करती है और चालक दल की सुरक्षा को खतरे में डालती है। अब अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन की निगरानी और कड़ी की जाएगी ताकि ऐसे अन्य अवैध नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

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