ईरान के 'शैडो फ्लीट' पर अमेरिका का बड़ा प्रहार, दर्जनों कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध

अमेरिका ने ईरान की अवैध तेल तस्करी की कमर तोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी सरकार ने "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" के तहत ईरान के तथाकथित 'शैडो फ्लीट' (गुप्त जहाजों के बेड़े) पर कड़े प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य ईरान के उस अवैध तेल व्यापार को रोकना है, जिससे वहां की सेना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को भारी फंडिंग मिलती है।
अमेरिकी ट्रेजरी और स्टेट डिपार्टमेंट ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इस बड़े एक्शन में कुल 27 कंपनियों, 6 व्यक्तियों और 22 जहाजों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। ट्रेजरी विभाग ने 17 संस्थाओं और उनसे जुड़े जहाजों को निशाना बनाया, जबकि स्टेट डिपार्टमेंट ने 10 संस्थाओं, 6 लोगों और 5 जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं।
तेल व्यापार के जरिए सैन्य फंडिंग पर लगाम
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने इस कदम को बेहद निर्णायक बताते हुए कहा कि इससे ईरान के अवैध समुद्री बुनियादी ढांचे का बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई ईरान के राजस्व के मुख्य स्रोत को काटकर क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने की एक कोशिश है। वहीं, स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता थॉमस पिगोट ने जोर दिया कि अमेरिका शासन को अलग-थलग करने और समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर संभव राजनयिक और आर्थिक हथियार का इस्तेमाल कर रहा है।
जांच में पाया गया कि इस नेटवर्क में चीन, हांगकांग, मार्शल आइलैंड्स और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स जैसे क्षेत्रों में फैली मुखौटा कंपनियां शामिल थीं। प्रतिबंधित जहाजों की सूची में कोमोरोस का डामर टैंकर 'PARITOSH', पनामा का 'BITU', कैमरून का 'Shenzhen' और वानुआतु का 'Tina 5' प्रमुख हैं।
यह घटनाक्रम जुलाई 2026 में ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के बाद आया है। ट्रेजरी अधिकारियों का अनुमान है कि वर्तमान नाकेबंदी के बावजूद लगभग 2 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल अभी भी समुद्र में जहाजों पर मौजूद है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 अक्टूबर को यह साफ कर दिया कि वह नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर किसी भी सैन्य हमले के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि तेहरान के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक दिशा में चल रही है।