अमेरिका के प्रतिबंधों से ईरान का केंद्रीय बैंक वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से लगभग कटा

ईरान: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण ईरान की वैश्विक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच लगातार कमजोर होती जा रही है। इसकी वजह से लोग और कारोबारी महंगे और जोखिम भरे वित्तीय रास्ते अपनाने को मजबूर हो रहे हैं। 13 अक्टूबर 2026 तक ईरान का केंद्रीय बैंक काफी हद तक वैश्विक वित्तीय तंत्र से अलग हो चुका बताया गया है।
यह स्थिति अमेरिकी विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) और यूरोपीय संघ की सख्त कार्रवाइयों से बनी है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का "ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट" अब डिजिटल संपत्ति वाले प्लेटफॉर्म, शैडो बैंकिंग नेटवर्क और उन विदेशी वित्तीय संस्थानों को भी निशाना बना रहा है, जो ईरान की पूंजी तक पहुंच में मदद करते हैं।
1 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी ट्रेजरी ने रूस से जुड़े शैडो बैंकिंग नेटवर्क A7 के खिलाफ कार्रवाई की। इस नेटवर्क का इस्तेमाल ईरानी सरकार और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) प्रतिबंधों से बचने के लिए करते थे। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि विभाग उस ढांचे को तोड़ रहा है, जिससे ईरान वित्तीय पाबंदियों को दरकिनार कर पाता है।
5 अक्टूबर की चेतावनी के बाद OFAC ने साफ किया कि जो भी विदेशी वित्तीय संस्थान प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ लेनदेन करेगा, उस पर तुरंत जुर्माना लग सकता है। इसमें अमेरिकी कॉरेस्पॉन्डेंट खातों तक पहुंच खोने का खतरा भी शामिल है।
ईरान के भीतर अर्थव्यवस्था पर दबाव साफ दिख रहा है। सितंबर में औद्योगिक खरीद प्रबंधक सूचकांक लगातार 11वें महीने 50 से नीचे रहा। कच्चे माल की लागत सात साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। यूएई के एक बड़े वित्तीय मध्यस्थ के रूप में भूमिका खत्म होने के बाद संस्थाएं हवाला नेटवर्क, विकेंद्रीकृत क्रिप्टोकरेंसी और रियाल-रूबल में सीधे लेनदेन की ओर बढ़ रही हैं, ताकि SWIFT प्रणाली से बचा जा सके।
कूटनीतिक तनाव भी बढ़ा है। 12 अक्टूबर 2026 को RAF फेयरफोर्ड की एक घटना पर अमेरिका, ब्रिटेन और कुछ अन्य देशों ने संयुक्त बयान जारी किया। इसके बाद 13 अक्टूबर को ब्रिटेन ने दो ईरानी नागरिकों को प्रतिबंधित सूची में डाला। इनमें IRGC की काउंटरएस्पायोनेज प्रमुख रुहल्ला बज़गांदी और सहायक शहराम अली रज़ा तमरज़ादेह जक्की शामिल हैं, जिन पर शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में भूमिका का आरोप है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि औपचारिक बातचीत आगे बढ़ाने से पहले तेहरान की मांगें पूरी होनी चाहिए। उनके मुताबिक इनमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, शत्रुता खत्म करना, जमी हुई संपत्तियां जारी करना और नए प्रतिबंध हटाना शामिल है।