अमेरिका में ईरान के खिलाफ जंग रोकने का प्रस्ताव खारिज, सीनेट में राष्ट्रपति ट्रंप को मिली बड़ी राहत।

अमेरिका की राजनीति में ईरान के साथ चल रहे तनाव को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। अमरीकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की युद्ध शक्तियों को सीमित करने वाले एक अहम प्रस्ताव को वोटिंग के जरिए खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद व्हाइट हाउस को ईरान के खिलाफ सैन्य मामलों में बड़ी राहत मिली है, जबकि संसद के भीतर इसे लेकर राजनीति काफी गरमाई हुई है।
सीनेट में क्या हुआ और कैसे पलटा पासा
गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को अमरीकी सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से एक प्रस्ताव लाया गया था। इसका मकसद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस शक्ति को कम करना था जिसके तहत वे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। इस प्रस्ताव पर सीनेट में कुल 99 वोट पड़े, जिसमें 50 वोटों से यह प्रस्ताव खारिज हो गया जबकि इसके पक्ष में 49 वोट ही पड़े। यह प्रस्ताव इससे पहले जुलाई के महीने में प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से पास हो चुका था। इसमें यह मांग की गई थी कि राष्ट्रपति ईरान के अंदर या उसके खिलाफ अमेरिकी सेना को तब तक दूर रखें जब तक कि इसके लिए सीधे तौर पर कांग्रेस यानी संसद की मंजूरी न ली जाए।
सांसदों के बीच बंटी नजर आई पार्टी लाइन
इस वोटिंग के दौरान सीनेट के भीतर राजनीतिक दलों के अंदर भारी मतभेद देखने को मिले। ज्यादातर डेमोक्रेट्स ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के अधिकांश सदस्यों ने इसके खिलाफ वोट किया। हालांकि, कुछ सांसदों ने अपनी पार्टी से हटकर वोटिंग की। रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों—केंटकी के रैंड पॉल, मेन की सुसान कोलिंस, अलास्का की लिसा मुर्कोव्स्की और नॉर्थ कैरोलिना के थॉम टिलिस ने राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के समर्थन में अपना वोट डाला। इसके उलट, डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन ने पार्टी लाइन से बाहर जाकर इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। वहीं मैरीलैंड की सीनेटर एंजेला एलोब्रूक्स ने इस वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और अपना वोट नहीं डाला।
आगामी चुनावों और महंगाई की चिंता
इस पूरी बहस और मतदान के दौरान संसद के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता साफ दिखाई दी कि ईरान के साथ चल रहा यह संघर्ष आने वाले समय में क्या रंग दिखाएगा। आगामी नवंबर के मिडटर्म चुनावों को लेकर सांसद काफी सतर्क नजर आए। इसके अलावा आम जनता के बीच ईंधन यानी पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर भी चिंताएं लगातार बनी हुई हैं। इस प्रस्ताव को लाने वाले लोगों का कहना था कि चुनाव से पहले युद्ध पर अपना रुख साफ करने का यह सांसदों के पास आखिरी मौका था।
ट्रंप प्रशासन का पुराना दावा और कानूनी खींचतान
ट्रंप प्रशासन की तरफ से पहले यह दावा किया गया था कि 7 अप्रैल 2026 को हुए संघर्षविराम के बाद ईरान के साथ होने वाली सैन्य शत्रुता प्रभावी रूप से समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद संसद की तरफ से इस प्रकार का प्रस्ताव लाना यह साबित करता है कि अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस सैन्य कार्रवाइयों पर अपने संवैधानिक अधिकारों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। इस बेहद कम अंतर से हारे हुए वोट ने यह साफ कर दिया है कि ईरान से जुड़े सैन्य फैसलों को लेकर कार्यपालिका यानी राष्ट्रपति और संसद के बीच खींचतान आगे भी जारी रहेगी।